
महुआडांड़ ; झारखंड के प्रसिद्ध शीत पर्यटन स्थल नेतरहाट स्थित शांति निकेतन स्कूल में इस समय शिक्षा का अलख कर्मठ शिक्षक की बदौलत जल रहा है। जुलाई माह में स्कूल के प्रभारी शिक्षक बंधु किसान के आकस्मिक निधन के बाद स्कूल के सामने संकट खड़ा हो गया था, लेकिन इसी बीच विद्यालय में कार्यरत घनश्याम नागेसिया ने मानवीय और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए स्कूल को बंद नहीं होने दिया।
निजी खर्च से चल रहा स्कूल का संचालन
बंधु किसान के निधन के बाद विभाग की ओर से अब तक किसी भी शिक्षक को स्कूल का प्रभार नहीं सौंपा गया है। ऐसे में स्कूल की सारी जिम्मेदारी घनश्याम नागेसिया के कंधों पर आ गई। सूत्रों के अनुसार घनश्याम नागेसिया पिछले कई दिनों से अपने निजी खर्च से ही स्कूल की हर गतिविधि को सुचारू रूप से चला रहे हैं। समय पर मिड-डे मील का संचालन हो, बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, स्कूल की साफ-सफाई और अन्य सरकारी कार्यक्रम समय पर हों – इन सबकी व्यवस्था वे खुद कर रहे हैं। उनकी इस निस्वार्थ सेवा के कारण स्कूल में पढ़ने वाले दर्जनों बच्चों का भविष्य सुरक्षित है।
ग्रामीणों ने की विभाग से प्रभारी नियुक्ति की मांग
घनश्याम नागेसिया के इस समर्पण को देखकर पूरे क्षेत्र के ग्रामीण गर्व महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घनश्याम ने साबित कर दिया है कि शिक्षक सिर्फ वेतन के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी काम करता है।ग्रामीणों ने जिला शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि शांति निकेतन स्कूल में जल्द से जल्द किसी योग्य शिक्षक को प्रभारी नियुक्त किया जाए, ताकि घनश्याम नागेसिया के प्रयासों को सरकारी मान्यता मिल सके और स्कूल का संचालन और बेहतर तरीके से हो सके।
शिक्षा के सच्चे प्रहरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि विषम परिस्थितियों में भी घनश्याम नागेसिया ने जिस तरह से स्कूल को संभाला है, वह प्रेरणादायक है। मिड-डे मील से लेकर बच्चों की उपस्थिति, किताब-कॉपी और समय सारणी तक हर चीज का वे खुद ध्यान रख रहे हैं।ग्रामीणों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, लातेहार से आग्रह किया है कि घनश्याम नागेसिया के कार्य को संज्ञान में लेते हुए उनकी सराहना की जाए और स्कूल में स्थायी प्रभारी की नियुक्ति कर इस प्रतिभावान शिक्षक के काम को और मजबूती दी जाए

