नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में अनियमितताओं पर राजभवन का बड़ा फैसला, कुलपति के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार छीने

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर राजभवन ने सख्त कार्रवाई की। कुलपति के अधिकार छीने गए, अब नीतिगत फैसलों के लिए पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी।

News Aroma
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रांची: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में लगातार सामने आ रही प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राजभवन ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने एनपीयू के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब कुलपति केवल रुटीन कार्यों का ही संपादन कर सकेंगे तथा किसी भी प्रकार के नीतिगत या वित्तीय निर्णय लेने के लिए उन्हें राजभवन से पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। राजभवन द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब विश्वविद्यालय के प्रशासनिक व वित्तीय कार्यों के संचालन के लिए लोकपाल की नियुक्ति किए जाने की संभावना है।
यह सख्त कदम स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुई भारी अनियमितताओं के बाद उठाया गया है। जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय के काम से इतर व्यावसायिक गतिविधियों (कमर्शियल प्रिंटिंग) से जुड़े काम के लिए नियम-कायदों को ताक पर रखकर 2.68 करोड़ रुपए का अनियमित भुगतान किया गया था। स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में परीक्षा नियंत्रक डॉ. रीना सहाय की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना ही भुगतान की अनुशंसा कर दी थी। इसके अलावा परीक्षा नियंत्रक डॉ. तीर्थेश्वर प्रसाद को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर बातें सामने आई हैं।
उल्लेखनीय है कि कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह पर विश्वविद्यालय में पद पर बने रहने के लिए फर्जी शैक्षणिक एवं अनुभव दस्तावेज प्रस्तुत करने के गंभीर आरोप भी लगे थे। इससे पूर्व रांची विश्वविद्यालय में कुलपति रहने के दौरान भी उनके कार्यकाल पर सवाल खड़े हुए थे। इन सब के साथ-साथ नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के पूर्व ओएसडी डॉ. अमित कुमार सेठ तथा पूर्व वित्तीय सलाहकार और पूर्व परीक्षा नियंत्रक रहे अन्य पदाधिकारियों पर भी वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं

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