
विवेकानंद कुशवाहा
बिहार के विकास पुरुष नीतीश चाचा मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ कर राज्यसभा जा रहे हैं। जैसी कि सूचनाएं हैं उन्होंने अपना उत्तराधिकारी एक कर्मठ, ऊर्जावान व अनुभवी नेता को चुना है। जल्द ही इस बात की घोषणा भी हो ही जायेगी। नीतीश चाचा ने बिहार को सीरीज में बदला। एक झटके में सबकुछ करने की नहीं सोची। पहले बिहार की उस समय की स्थिति के मद्देनजर प्राथमिकताएं तय कीं, ताकि जनता को बदलाव दिखे ही नहीं, बल्कि महसूस भी हो। उस समय मैं इंटरमीडिएट सेकेंड ईयर का छात्र था। ‘लॉ एंड ऑर्डर’ की स्थिति खराब थी, लेकिन उससे भी ज्यादा खराब उस स्थिति को लेकर बने परसेप्शन की थी। पुलिस तब भी थे, कोर्ट-कचहरी भी थे, लेकिन न्याय मिलते-मिलते पीढी बदल जाती थी।
नीतीश चाचा ने गुंडों/बाहुबलियों का होम्योपैथी उपचार किया या तो जेल भेजा या फिर समाजसेवक बना दिया। छोटे-मोटे अपराधी की जमकर कुटाई का आदेश पुलिस को दिया। एक साल के भीतर स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) के जरिये हजारों अपराधियों को जेल भेजा गया, जिससे अपहरण और रंगदारी के मामलों में भारी कमी आयी। तब सोशल मीडिया नहीं थी, तो हर बात पर उनके फैसले का ट्रायल नहीं हुआ। अखबारों के कान भी थोड़े अमेठे गये। नतीजा यह हुआ कि छवि बदलने लगी। यह एक बड़ी उपलब्धि थी। 2006 में नीतीश चाचा ने वह मास्टरस्ट्रोक चला, जिसने बिहार की सियासत की दिशा बदल दी। बिहार, देश का पहला राज्य बना, जहां पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गयी। उसी साल उन्होंने ‘जनता दरबार’ की शुरुआत की। वर्षों लटके, लटकाये गये काम चुटकियों में निबटने लगे। यह सुशासन की शुरुआत थी।
मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना ने तो कमाल ही कर दिया। मिडिल स्कूल से हाई स्कूल तक जाने में लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट बहुत ज्यादा था। इसके पीछे के कारण को समझ कर मिडिल स्कूल पास करते ही लड़कियों को साइकिल दिये गये। उसमें कोई बिचौलिया नहीं, डाइरेक्ट बेनेफिट छात्रा के परिवार तक पहुंचा। यह बिहार की सबसे क्रांतिकारी योजनाओं में से एक रही। इस बीच पुल और सड़क के निर्माण के क्रम में राजधानी पटना तक छह घंटे में पहुंचने का लक्ष्य रखा गया। कांट्रेक्ट बड़ी क्रेडिट वाली कंपनियों को दिया गया। गुणवत्ता खराब होने पर, पेनाल्टी के तौर उसको ठीक करने की बात की गयी। नतीजा ऐसा रहा कि हम जैसे युवा उत्साह में भागलपुर से साइकिल चला कर 20 किमी दूर अपने गांव पहुंच गये।
किसानों की आय में वृद्धि के लिए एक रोडमैप बनाया गया, जिसमें किसानों को कैश क्रॉप की खेती करने की ट्रेनिंग, प्रोत्साहित किया गया। इसी दौरान साइकिल के साथ बालिका पोशाक योजना लागू की गयी। मुझे याद है कि ब्लॉक से कोई प्रमाण पत्र बनवाने में बिचौलियों की पूजा करनी पड़ती थी। सीओ भगवान से कम नहीं होते थे। RTPS ने आकर चीजें सुधारी, लेकिन ब्लॉक में भ्रष्ट लोगों का नेक्सस तगडा निकला। येन केन प्रकारेण वह कागज बनाने में फंसाते रहे। इनके साथ भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्ती, अति-पिछड़ा और महादलित वर्ग के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं लागू की गयीं। फिर सात निश्चय के सीरीज आये। हर घर बिजली, हर घर नल जल, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं आयीं।
जीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्वरोजगार और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर उन्होंने न्याय के साथ विकास की कहानी गढ़ दी। BPSC का हाल इतना बुरा था कि वर्षों की भर्तियां बैकलॉग में पड़ी थी। कई बार की भर्तियां एक बार में पूरी की गयी, तब जाकर आज BPSC आज टाइम से भर्तियां कर पाने की स्थिति में है। सरकारी नौकरी देने के मामले में बिहार बीते 20 वर्षों अन्य राज्यों से आगे रहा होगा। इनके अलावा नीतीश चाचा द्वारा चलाये गये जल-जीवन-हरियाली अभियान और जाति आधारित गणना के दूरगामी परिणाम होंगे। बिहार भले अन्य राज्यों से आंकड़ों में पीछे दिख रहा हो, पर दिशा विकासोन्मुखी है। नये मुख्यमंत्री के लिए चुनौती इन कार्यों को नयी ऊंचाई देने की होगी। जो वह देंगे, तभी चाचा आशीर्वाद दिये हैं।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

