सुप्रीम कोर्ट से नहीं चाहिए कोई मेहरबानी : किसान नेता

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नई दिल्ली: जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अभीक साहा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाए जाने के फैसले की सराहना की, लेकिन उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा गठित समिति से आंदोलनरत किसानों का कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन दो जनवरी को घोषित कार्यक्रमों के अनुसार जारी रहेगा और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से किसी भी प्रकार की रिलीफ नहीं चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल लागू तीन कृषि कानूनों के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर, 2020 से किसानों का आंदोलन चल रहा है और इस बीच केंद्र सरकार के साथ किसान संगठनों के आठ दौर की वार्ता बेनतीजा रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाने का फैसला लिया।

साथ ही, शीर्ष अदालत ने इन तीनों कानूनों से जुड़े किसानों के मसले का हल निकालने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का निर्णय लिया, जिसमें कृषि अर्थशास्त्री और किसान नेता भी शामिल हैं।

लेकिन आंदोलनकारी किसानों का उसमें कोई प्रतिनिधि नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए अभीक साहा ने आईएएनएस से कहा, सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों पर जो रोक लगाई है, वह अच्छी बात है, लेकिन हम तो कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तीनों कनूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसानों का चल रहा आंदोलन जारी रहेगा।

साहा ने आगे कहा, दो जनवरी को घोषित कार्यक्रमों के मुताबिक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

समिति गठित करने के मसले पर उन्होंने कहा, यह सुप्रीम कोर्ट का विशेषाधिकार है और इस पर हम कुछ नहीं कहेंगे।

समिति इस मसले पर अपनी बातचीत करती रहे, लेकिन हमें उससे कुछ लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट से हमें न कोई रिलीफ चाहिए और न ही कोई मेहरबानी चाहिए।

किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने को लेकर इस महीने विभिन्न कार्यक्रम तय किए हैं, जिनमें 26 जनवरी को किसान परेड के आयोजन की घोषणा भी शामिल है।

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