पटना : सपने देखने के लिए पैसे नहीं चाहिए, लेकिन उन्हें जिंदा रखने के लिए हौसला जरूर चाहिए। पटना के शिवपुरी फ्लाईओवर के पश्चिमी कॉर्नर पर सुबह-सुबह अगर लोगों की भीड़ किसी छोटे से ठेले के आसपास दिखाई दे, तो समझ लीजिए आप ‘मैडम जी का नाश्ता कॉर्नर’ के पास पहुंच गए हैं। ₹50 में स्वादिष्ट नाश्ता परोसने वाली सोनिया मैडम का यह छोटा सा ठेला आज आसपास के लोगों की सुबह का हिस्सा बन चुका है।लेकिन इस ठेले की कहानी सिर्फ नाश्ते की नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने परिस्थितियों के सामने अपने सपनों को मरने नहीं दिया।सोनिया का सपना था कि वह किसी बड़े होटल में मास्टर शेफ बने। चमचमाती रसोई हो, सिर पर शेफ की टोपी हो और उसके हाथों के बनाए व्यंजनों की तारीफ करने वाले लोग हों।
फिर जिंदगी ने करवट ली।परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं और हालात ने उन्हें बड़े होटल की रसोई से निकालकर सड़क किनारे एक ठेले तक पहुंचा दिया। लेकिन सोनिया ने इसे अपनी हार नहीं बनने दिया। उन्होंने सोचा—रसोई कहीं भी हो सकती है, हुनर वही रहता है।आज सुबह होते ही वह अपने ठेले पर जुट जाती हैं। ग्राहक आते हैं, नाश्ता करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। किसी को शायद अंदाजा भी नहीं होता कि जिस महिला के हाथ का नाश्ता वह ₹50 में खा रहे हैं, उन्हीं हाथों पर एक पूरे परिवार की जिम्मेदारी टिकी है।बूढ़े माता-पिता और छोटे भाई-बहनों की जरूरतें इसी छोटे से कारोबार से पूरी होती हैं। तमाम खर्च निकालने के बाद रोज औसतन ₹1500 से ₹2000 तक की बचत हो जाती है। यही उनकी मेहनत की कमाई है और यही परिवार के भविष्य का सहारा।फुटपाथ की जिंदगी भी आसान नहीं। कभी जगह की चिंता, कभी मौसम की मार और कभी पुलिस की रोक-टोक। बावजूद इसके सोनिया अगली सुबह फिर अपने ठेले पर खड़ी मिलती हैं।क्योंकि उनके पास हार मानने का विकल्प नहीं है।
सोनिया की कहानी हमें बताती है कि काम छोटा-बड़ा नहीं होता, नजरिया बड़ा होना चाहिए।जिस लड़की ने कभी बड़े होटल की मास्टर शेफ बनने का सपना देखा था, वह आज पटना के फुटपाथ पर नाश्ता बना रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि होटल की रसोई तक पहुंचने का रास्ता बदल गया है।
सपना अभी भी वहीं है।और शायद यही सोनिया की सबसे बड़ी ताकत है—हालातों ने उन्हें फुटपाथ पर खड़ा किया, लेकिन उनके हौसले को कभी झुका नहीं पाए।शिवपुरी फ्लाईओवर के पश्चिमी कॉर्नर से गुजरते हुए अगली बार जब आपको भीड़ से घिरा वह छोटा-सा ठेला दिखाई दे, तो सिर्फ ₹50 का नाश्ता मत देखिएगा।उस ठेले पर आपको मेहनत, आत्मसम्मान, परिवार की जिम्मेदारी और एक अधूरे लेकिन जिंदा सपने की कहानी भी दिखाई देगी।कभी-कभी बड़े सपनों की शुरुआत बड़ी इमारतों से नहीं,एक छोटे से ठेले और बड़े हौसले से होती है।


