केंद्रीय मंत्री जोशी ने युवाओं से समस्याओं की पहचान करने और समाधान खोजने का आग्रह किया

प्रह्लाद जोशी ने युवाओं से स्थानीय समस्याओं को समझकर व्यावहारिक समाधान खोजने का आग्रह किया। आईआईएससी में सेवा प्रथम नवाचार चुनौती के उद्घाटन पर स्वदेशी नवाचार पर जोर दिया।

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बेंगलुरु: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने युवाओं से अपने आसपास की समस्याओं को समझने और लोगों के जीवन में सुधार के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने का शुक्रवार को आग्रह किया। जोशी ने यहां भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में सेवा प्रथम नवाचार चुनौती (एसएफआईसी) के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नवाचार की शुरुआत “वास्तविक मानवीय जरूरतों” को समझने से होनी चाहिए और अंततः इसका उद्देश्य आम लोगों की सेवा करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह किसी समस्या को समझने और उसका समाधान खोजने से शुरू होता है। एसएफआईसी की खासियत यह है कि यह युवाओं को अपने आसपास की समस्याओं को करीब से समझने और उन पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।’’ एसएफआईसी में पांच राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों-कर्नाटक, तमिलनाडु, केरलम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी को शामिल किया जायेगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि युवा नवोन्मेषकों को पहले अपने आसपास की समस्याओं को समझना चाहिए, कमियों की पहचान करनी चाहिए तथा लोगों की जरूरतों के आधार पर समाधान खोजने चाहिए। यातायात नियमों के उल्लंघन, कचरा निपटान और पानी की बर्बादी जैसी रोजमर्रा की समस्याओं का जिक्र करते हुए जोशी ने कहा कि इन पर बारीकी से ध्यान दिये जाने की जरूरत है और तकनीकी या प्रशासनिक उपायों के माध्यम से इनका समाधान किया जा सकता है। उन्होंने उभरती चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधानों का आह्वान करते हुए कहा कि हरित हाइड्रोजन, परिवहन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जोशी ने कहा कि छात्रों को कम उम्र से ही प्रयोग करने, चीजें बनाने और नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, प्रयोग के आधार पर सीखने और समस्या समाधान को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है। इसलिए, यही नयी शिक्षा नीति का विचार है। कर्नाटक में इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे बंद कर दिया गया है।’’ मंत्री ने कहा कि देशभर में 10,000 से अधिक ‘अटल टिंकरिंग लैब’ सक्रिय रूप से छात्रों को जोड़ रही हैं। उन्होंने इन्हें स्कूली बच्चों में नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों का एक उदाहरण बताया। जोशी ने युवाओं से न केवल घरेलू जरूरतों के लिए बल्कि वैश्विक बाजार के वास्ते भी नवाचार करने का आग्रह किया।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।