प्रकाशन संस्थान तृतीय अनुवाद सम्मान जेएनयू के प्रोफेसर बीआर दीपक को दिया गया

जेएनयू के चीनी भाषा विद्वान प्रो. बीआर दीपक को प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान 2025 मिला। समारोह में एशियाई अनुवाद परंपरा, संस्कृति और ज्ञान के आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।

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नई दिल्ली : प्रकाशन संस्थान तृतीय अनुवाद सम्मान पुरस्कार चीनी भाषा के विद्वान और अनुवादक प्रो बीआर दीपक को दिया गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में गुरुवार को इस बार का प्रकाशन संस्थान अनुवाद पुरस्कार बी आर दीपक को दिया गया जो जेएनयू के चीनी अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर है। बी आर दीपक ने पचास से अधिक पुस्तकों की सर्जना की है जिसमें मौलिक और अनूदित लेखन दोनों शामिल है।
इस सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि हरिवंश नारायण सिंह , उप – सभापति , राज्यसभा थे एवं विचार-गोष्ठी विषय ‘ एशियाई अनुवाद परंपरा ‘ पर वक्तव्य देने के लिए वक्ताओं के रूप में हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका , प्रसिद्ध समीक्षक एवं व्यंग लेखक रवींद्र त्रिपाठी एवं प्रो. देवशंकर नवीन आमंत्रित थे। जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित , कुलसचिव रविकेश एवं भाषा संस्थान अधिष्ठाता शोभा सिवसंकरन मौजूद थे।
कार्यक्रम का आरंभ भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष प्रो. सुधीर प्रताप सिंह के स्वागत वक्तव्य एवं सम्मानित अतिथियों के सम्मान एवं स्मृति चिह्न भेंट के साथ होता है।
सर्वप्रथम प्रो. देवशंकर नवीन ने एशियाई अनुवाद परंपरा विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए एक पूर्वपाठिका का निर्माण किया। प्रो. नवीन का मानना है कि विश्व की सबसे प्राचीनतम अनुवाद परंपरा भारतीय अनुवाद परंपरा है और इसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका ने अपने वक्तव्य में कहा कि अनुवादक एक सांस्कृतिक राजदूत होता है एवं अनुवाद द्वारा ही संसार को जानने समझने की प्रक्रिया संभव हो पाती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुमारजीव और दारा शिकोह के द्वारा किए गए सहयोगी अनुवाद (कोलैबोरेटिव ट्रांसलेशन) के महत्त्व को रेखांकित किया।
प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान प्राप्तकर्ता बी आर दीपक ने अपने वक्तव्य में एशियाई अनुवाद परंपरा के इतिहास पर संक्षेप में बात रखते हुए कहा “भारत की ज्ञान परंपरा , शिक्षाशास्त्र , नीतिशास्त्र और दर्शन से जुड़ी बाते अनुवाद के माध्यम से चीन तक पहुंची और संस्कृत के पैंतीस हजार से ज्यादा शब्दों को चीनी भाषा ने आत्मसात कर लिया है।”
इसके उपरांत प्रकाशन संस्थान , जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित एवं मुख्य अतिथि हरिवंश नारायण सिंह ने मिलकर ‘ प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान 2025‘ द्वारा बी आर दीपक को सम्मानित किया एवं पुरस्कार राशि के रूप में इक्यावन हज़ार धनराशि भेंट की।
इसके बाद सम्मान समारोह को अंतिम रूप देते हुए हरीश चंद्र शर्मा जी ने मुख्य अतिथि , अतिथि वक्ताओं एवं उपस्थित शिक्षक एवं विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मान समारोह का कुशल संचालन अनुवाद अध्ययन के अध्येता आशीष शाह ने कुशलता के साथ किया।

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