चिकित्सकों का कर्तव्य केवल इलाज करना नहीं, मरीजों के प्रति करुणा दिखाना भी है : राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों से मरीजों के इलाज के साथ करुणा, संवेदनशीलता और वंचित क्षेत्रों में निस्वार्थ सेवा करने का आह्वान किया।

Archana Ekka
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बिलासपुर (हिप्र) : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि करुणा, संवेदनशीलता और समाज की निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च माध्यम है। अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति ने बिलासपुर स्थित शक्तिपीठ की देवी माता श्री नैना देवी को नमन किया। उन्होंने बिलासपुर की पवित्र धरती और इसके ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नैना देवी के इस पवित्र धाम की यात्रा करके बहुत खुशी हो रही है। बिलासपुर वीरों की भूमि है। इसके वीर सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है। मैं भारत की रक्षा में योगदान देने वाले उन सभी अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करती हूं।’’ इस अवसर पर राष्ट्रपति ने पांच स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया और अन्य विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों और स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर के पहले बैच का हिस्सा होना उनके लिए बहुत गर्व की बात होनी चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि उनका मूल कर्तव्य केवल बीमारियों का निदान और उपचार करना नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और करुणा का भाव प्रदर्शित करना भी है। राष्ट्रपति ने कहा कि जब किसी मरीज को डॉक्टर से सहानुभूति और व्यक्तिगत जुड़ाव का एहसास होता है, तो बीमारी के खिलाफ आधी लड़ाई वहीं जीत ली जाती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे से जुड़े लोग अक्सर दूरदराज और दुर्गम इलाकों में सेवा करने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि देश को एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से उम्मीद है कि वे इस सोच से ऊपर उठेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि वह स्वयं भी एक दूरदराज और कठिन परिस्थितियों वाले परिवेश से आती हैं।

स्नातक डिग्रीधारी चिकित्सा विद्यार्थियों से भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची संतुष्टि केवल निस्वार्थ सेवा से मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले वंचित लोगों के प्रति प्रेम और अपनेपन की भावना विकसित करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना उनके जीवन का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। समारोह में डॉक्टरों ने पारंपरिक कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर डिग्रियां प्राप्त कीं। एम्स प्रशासन ने पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए यही पोशाक निर्धारित की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा, राज्यपाल कविंदर गुप्ता, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता समारोह में मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर एम्स बिलासपुर के हेलीपैड पहुंचीं और वहां से सीधे दीक्षांत समारोह स्थल के लिए रवाना हो गईं।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।