एक खंडहर में मिला अर्थशास्त्र के महान विद्वान प्रो. जे.के. मेहता का चेंबर!

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एक पुरानी इमारत में मिला महान अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेके मेहता का चेंबर। उनकी विरासत और ऐतिहासिक भवन की बदहाली ने कई सवाल खड़े किए।

4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

कभी-कभी इतिहास की तलाश में निकलिए तो ऐसी चीजें हाथ लग जाती हैं, जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होती। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, मैंने कहीं पढ़ा था कि वर्ष 1910 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने अपने आठ फैकल्टी के लिए इंडियन प्रेस से आधी जमीन खरीदी थी। इसमें इंडियन प्रेस द्वारा बनवाया गया तीन भवन भी था, दो आज तक मौजूद है। यह जानने के बाद मेरे मन में उस इमारत को देखने की जिज्ञासा पैदा हुई और एक दिन मैं उसे खोजने निकल पड़ा।

इकोनॉमिक्स विभाग के पीछे पहुंचा तो वहां एक पुरानी, खंडहरनुमा इमारत दिखाई दी। कभी इस भवन में विश्वविद्यालय के कर्मचारी रहा करते थे, लेकिन आज इसकी हालत बेहद जर्जर है। हालांकि, मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस इमारत की तलाश मुझे भारतीय अर्थशास्त्र के एक बड़े विद्वान प्रोफेसर जे.के. मेहता के चेंबर तक पहुंचा देगी।

जैसे ही मैं उस चेंबर के दरवाजे के पास पहुंचा, मेरी नजर वहां लिखे नाम पर पड़ी— प्रोफेसर जे.के. मेहता।
यकीन मानिए, उस क्षण मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में तीन साल पढ़ाई की थी। इस दौरान प्रोफेसर जे.के. मेहता के विचारों और उनके प्रसिद्ध ‘आवश्यकता विहीनता के सिद्धांत’ (Theory of Wantlessness) को भी पढ़ा था। लेकिन कभी यह कल्पना नहीं की थी कि एक दिन अचानक उनके चेंबर के सामने खड़ा होऊंगा।

जमशेद कैखुसरो मेहता, जिन्हें दुनिया प्रोफेसर जे.के. मेहता के नाम से जानती है, भारतीय अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण विद्वानों में से एक थे। उन्होंने अर्थशास्त्र को केवल धन, उत्पादन और उपभोग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भारतीय दर्शन और नैतिक चिंतन से जोड़ने का प्रयास किया। उनका आवश्यकता विहीनता का सिद्धांत कहता है कि मनुष्य के वास्तविक सुख का रास्ता अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को लगातार बढ़ाने में नहीं, बल्कि उन्हें सीमित करने में है। उनके अनुसार, आवश्यकताओं को कम करके ही मनुष्य संतोष और वास्तविक मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है।

और आज उसी महान अर्थशास्त्री का चेंबर मेरे सामने था। यह पूरा स्थान कभी उनके उपयोग के लिए आवंटित था। भवन की दीवारों और दरवाजों पर आज भी कुछ पुराने नामों के निशान दिखाई देते हैं। लेकिन जिस जगह कभी विद्वानों की आवाजाही और बौद्धिक गतिविधियां रही होंगी, वह आज खंडहर में तब्दील हो चुकी है।

इस इमारत की बदहाली देखकर मन में एक सवाल जरूर उठा—क्या हमारी ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत की यही नियति है? जिस विश्वविद्यालय ने देश को बड़े-बड़े विद्वान दिए, वहां उन विद्वानों से जुड़ी स्मृतियां इस तरह उपेक्षित पड़ी हैं। इमारत की हालत देखकर लगता है कि यदि जल्द संरक्षण नहीं हुआ तो शायद कुछ वर्षों बाद इसका अस्तित्व भी समाप्त हो जाए।
खैर, इस विरासत को बचाने के लिए मैं फिलहाल कुछ कर नहीं सकता, लेकिन उस दिन एक छोटी-सी ऐतिहासिक खोज ने मुझे बेहद खुशी दी। जिस प्रोफेसर को कभी किताबों में पढ़ा था, अचानक उनके चेंबर के सामने खड़े होने का अवसर मिल गया।
मेरे लिए उस दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि यही थी कि इतिहास के पन्नों में पढ़े गए प्रोफेसर जे.के. मेहता से जुड़ी एक जीवंत स्मृति को अपनी आंखों से देख पाया।

Share This Article
Avantika Raj Choudhary एक अनुभवी और बहुआयामी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। इस दौरान उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वेबसाइट संचालन जैसे मीडिया के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खबरों की गहरी समझ, प्रभावशाली प्रस्तुति और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाने की उनकी क्षमता उन्हें एक सशक्त मीडिया प्रोफेशनल बनाती है।अपने करियर के दौरान Avantika ने Jharkhand Live, The Fourth Pillar, 22 Scope और Khabar Mantra जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है, जहाँ उन्होंने अपनी पेशेवर दक्षता, मेहनत और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एंकर के रूप में उनकी प्रभावशाली संवाद शैली, रिपोर्टर के रूप में जमीनी हकीकत को सामने लाने की क्षमता, और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में सटीक एवं आकर्षक लेखन ने उन्हें मीडिया जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।डिजिटल और ग्राउंड मीडिया दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करने का अनुभव रखने वाली Avantika Raj Choudhary पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के साथ खुद को निरंतर अपडेट करती रही हैं। उनकी कार्यशैली में निष्पक्षता, समर्पण और दर्शकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से झलकता है। मीडिया इंडस्ट्री में उनका यह अनुभव और कौशल उन्हें भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है.