नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कर्मचारियों को लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान से जुड़े एक मामले में बृहस्पतिवार को पंजाब के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा और अन्य के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी।

पीठ ने कहा कि इस मामले में मुख्य सचिव को बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘अगले आदेश तक …आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है।’’ वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की। पीठ ने उच्च न्यायालय में अवमानना की कार्रवाई का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ”आप मुख्य सचिव को जेल भेजने में क्यों रुचि रखते हैं? हम अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा देंगे।” पीठ ने अवमानना की कार्रवाई का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ता के वकील से यह भी पूछा कि वे मुख्य सचिव द्वारा कथित तौर पर राज्य के विभागों को जारी किए गए एक आंतरिक पत्र पर कैसे भरोसा कर सकते हैं।

पीठ ने कहा, ”हम इस तरह दबाव बनाने की कोशिश को पसंद नहीं करते।” उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसने उच्च न्यायालय के 12 अक्टूबर के आदेश और उसके बाद जारी एक अन्य आदेश का अध्ययन किया है, जिसमें मुख्य सचिव को इस मामले में उसके समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा, ”आगे के आदेश तक आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है।” सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की, ”सरकारी कर्मचारियों को यहां अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए। तभी उनकी जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।” पीठ ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय के एक अन्य आदेश के खिलाफ दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर भी सुनवाई की।
राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि मौजूदा सरकार को पिछली सरकार से करीब 13,000 करोड़ रुपये का विरासत में मिला बकाया चुकाने की जिम्मेदारी मिली है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा कि 31 मार्च, 2027 तक बकाया राशि में से कितनी रकम का भुगतान किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ”आपको कुछ राहत मिली है। कृपया सकारात्मक जवाब के साथ आइए।” इसके साथ ही मामले को एक दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के तीन अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए, जिनमें राज्य सरकार भी शामिल है। उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता दो सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया था।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की उन अपीलों को खारिज कर दिया था, जो एकल पीठ के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया डीए जारी करने के निर्देश के खिलाफ दायर की गई थीं। उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि जब तक इस तरह के सभी बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार बड़े पैमाने पर प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापन अभियान जैसे गैर-उत्पादक खर्च नहीं करेगी। उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर को मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।
आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया कि ये कार्यवाही एक रिट याचिका और ‘‘लेटर्स पेटेंट अपील’’ (एलपीए) में दायर विविध आवेदनों से शुरू हुई थी, जिनका पहले ही निपटारा किया जा चुका था। याचिका में कहा गया कि आवेदकों ने अदालत के पहले के फैसले का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने को लेकर कार्रवाई की मांग की थी, जबकि मूल याचिकाकर्ताओं ने इसी मुद्दे पर पहले ही अलग से दीवानी अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी थी।


