
नई दिल्ली : लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कथित दोहरी नागरिकता मामले में उपजी स्थिति से व्यथित न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वह इस मामले की सुनवाई के लिए किसी अन्य न्यायाधीश को नामित कर दें। हालांकि, न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने यह स्वीकार किया कि 17 अप्रैल को फैसला सुनाने से पहले उन्हें इस मामले में आरोपी राहुल गांधी को नोटिस जारी करना चाहिए था।
न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने सभी पक्षों के वकीलों को फटकार लगाई कि उन्होंने उनके सामने सही कानूनी स्थिति पेश नहीं की। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने 17 अप्रैल को एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि, जब 18 अप्रैल को यह आदेश हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया तो उसमें बताया गया था कि आदेश टाइप होने और उस पर हस्ताक्षर होने से पहले न्यायाधीश को पता चला कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक अहम फैसले के अनुसार इस मुद्दे पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले राहुल गांधी को नोटिस जारी करना अनिवार्य है।

