रांची : रांची की मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक में खड़े सूखे और जर्जर पेड़ अब आम जनता के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं रह गए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और रिहायशी इलाकों में जगह-जगह खड़े ये सूखे पेड़ किसी भी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। बीते वर्षों में खराब मौसम, तेज हवाओं और बारिश के दौरान इन पेड़ों व इनकी भारी-भरकम डालियों के गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जबकि स्कूल बसें और घर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसके बावजूद खतरनाक पेड़ खड़े है जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

वन विभाग की ओर से शहर भर में करीब एक हजार से अधिक सूखे पेड़ों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन इन्हें हटाने की कागजी प्रक्रिया धरातल पर सुस्त रफ्तार से चल रही है। स्थिति यह है कि पेड़ों की डालियों की छंटाई के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रॉली ट्री मशीन तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले चुकी है। सूखे पेड़ों को हटाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का जिम्मा वन विभाग के साथ-साथ रांची नगर निगम और जिला प्रशासन का भी है। लेकिन आपस में बेहतर तालमेल न होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लोअर चुटिया स्थित कमलू तालाब के पास केतारी बागान घाट रोड पर मुख्य सड़क किनारे एक विशालकाय जर्जर पेड़ महीनों से खड़ा है, जिसकी सूखी डालियां आए दिन टूटकर सड़क पर गिरती रहती हैं। इसी तरह डोरंडा से कुसई जाने वाले मार्ग पर स्थित सेठ सीताराम स्कूल परिसर में खड़ा विशाल सूखा पेड़ हर समय स्कूली बच्चों और गुजरने वाले वाहनों के लिए खतरा बना हुआ है। कोकर इंडस्ट्रियल एरिया में भी एक सूखा पेड़ सड़क की ओर खतरनाक तरीके से झुका हुआ है, जबकि यह मार्ग रिम्स जाने वाले मरीजों और एंबुलेंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि खुद वन विभाग परिसर में पार्किंग के पास ही एक सूखा पेड़ महीनों से खड़ा है, जो वहां के कर्मचारियों और आने-जाने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते वन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन ने आपस में समन्वय बनाकर इन चिह्नित सूखे पेड़ों की कटाई और छंटाई नहीं कराई, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।


