रांची: रांची रेल मंडल ने रेलवे ट्रैक पर काम करने वाले कीमैन, ट्रैकमेन और पेट्रोलिंग टीमों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पहली बार ‘रक्षक’ (अप्रोचिंग ट्रेन वार्निंग सिस्टम) उपकरण के उपयोग की तैयारी की है। रेलवे ट्रैक पर मरम्मत या गश्त के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड ने इस तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश जारी किए हैं। इस प्रणाली के तहत ट्रैककर्मियों के पास मौजूद ‘रक्षक’ डिवाइस में ट्रेन के करीब आते ही बीप, अलार्म और एलईडी लाइट के जरिए अलर्ट जारी होगा। इससे कर्मचारियों को ट्रेन के आगमन की सूचना 2 से 3 मिनट पहले ही मिल जाएगी, जिससे वे समय रहते सुरक्षित स्थान पर हट सकेंगे।

‘रक्षक’ एक छोटा रेडियो फ्रीक्वेंसी रिसीवर डिवाइस है, जिसे कर्मचारी अपने साथ रखते हैं। जब कोई ट्रेन संबंधित स्टेशन या ब्लॉक सेक्शन में प्रवेश करती है, तो ट्रैक साइड ट्रांसमीटर के माध्यम से सिग्नल प्रसारित होता है। ट्रेन के करीब आते ही कर्मचारी के रक्षक उपकरण में अलार्म और वाइब्रेशन शुरू हो जाता है। घने कोहरे, अंधेरे या मोड़ वाले स्थानों पर जहां दूर से ट्रेन दिखाई नहीं देती, वहां यह व्यवस्था ट्रैक कर्मियों के लिए अत्यंत मददगार साबित होगी। पूर्व में भी रांची रेल मंडल में ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारी ट्रेन की चपेट में आ चुके हैं, जिससे इस तकनीक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। आगामी तीन महीनों में इस उपकरण का उपयोग रांची मंडल के विभिन्न रेल खंडों पर शुरू कर दिया जाएगा।


