पार्किंग विवाद में सुपरवाइजर के साथ मारपीट
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल परिसर में पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान ठेकेदार के कर्मचारियों ने अस्पताल के सुपरवाइजर अजीत कुमार के साथ मारपीट की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के विरोध में शनिवार सुबह अस्पताल के गैर-चिकित्सीय कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। कर्मचारियों ने उपाधीक्षक कार्यालय का घेराव कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उपाधीक्षक की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद करीब एक घंटे तक बाधित रहा काम फिर से शुरू हुआ।
ठेकेदार को हटाने की मांग, फिर भी मिली 15 दिन की मोहलत
मारपीट की घटना के बाद संबंधित पार्किंग ठेकेदार को हटाने की मांग उठी। हालांकि, सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों की बैठक के बाद तत्काल ठेका समाप्त करने के बजाय मौजूदा ठेकेदार को 15 दिन और काम करने की अनुमति दे दी गई।
बूटी मोड़ निवासी संवेदक संजीव मिश्रा के ठेके की अवधि एक नवंबर को समाप्त हो रही है। प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर नया टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। तब तक पार्किंग की जिम्मेदारी मौजूदा ठेकेदार के पास ही रहेगी।
15.30 लाख रुपये का सालाना ठेका, वसूली पर भी सवाल
सदर अस्पताल की पार्किंग का एक साल का ठेका 15 लाख 30 हजार रुपये में दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्किंग के नाम पर प्रतिदिन करीब 10 हजार रुपये तक की वसूली होने का दावा किया गया है।
बताया गया है कि ठेके की शर्तों के अनुसार मरीजों और उनके परिजनों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इसके बावजूद उनसे पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में पार्किंग शुल्क की पारदर्शिता और ठेके की शर्तों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सुरक्षा गार्डों ने संभाली पार्किंग की जिम्मेदारी
शनिवार को ठेकेदार के कर्मचारी पार्किंग में नहीं पहुंचे, जिसके बाद अस्पताल के निजी सुरक्षा गार्डों ने व्यवस्था संभाल ली। मुख्य गेट पर गार्ड तैनात किए गए और हनुमान मंदिर के पास बंद पड़े दूसरे गेट को भी खोल दिया गया।
इस दौरान लोगों को बिना पार्किंग शुल्क दिए वाहन खड़े करने की सुविधा मिली। इसके बाद अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था और मरीजों के परिजनों से शुल्क वसूले जाने की जरूरत पर भी चर्चा शुरू हो गई।
नए टेंडर पर टिकी नजरें
फिलहाल, पुलिस मारपीट के मामले में कार्रवाई कर चुकी है, जबकि पार्किंग ठेके को लेकर प्रशासन ने 15 दिन की मोहलत दी है। अब निगाहें नए टेंडर की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
इस पूरे मामले में कर्मचारियों की सुरक्षा, पार्किंग शुल्क की पारदर्शिता और ठेके की शर्तों के पालन को लेकर उठे सवाल अहम बने हुए हैं। अस्पताल प्रशासन की अगली कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि पार्किंग व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।


