सदर अस्पताल की ‘लाल बिल्डिंग’ : 98 साल पहले था बिड़ला वीमेंस हॉस्पिटल, अब बन गया ऐतिहासिक धरोहर

रांची के सदर अस्पताल की 98 साल पुरानी लाल बिल्डिंग का 3 करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार पूरा, ऐतिहासिक वास्तुकला और विरासत को संरक्षित कर नई पहचान दी गई।

Archana Ekka
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विवेक शर्मा

रांची : शहर की ऐतिहासिक पहचान सदर अस्पताल स्थित ‘लाल बिल्डिंग’ का कायाकल्प हो चुका है। ऐतिहासिक वास्तु और जीवंत सांस्कृतिक धरोहर के मूल स्वरूप को संवारने में 3 करोड़ रुपए खर्च किया गया है। अब ये भवन अपने 98 साल पूरे कर चुका है। लाल सुरखी, गारे और चूने से बनी इस भव्य इमारत में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया, बल्कि उन्हें उनकी पुरानी स्थिति में ही पुनर्स्थापित किया गया है। कभी बिड़ला वीमेंस हॉस्पिटल कहे जाने वाला यह भवन अब ऐतिहासिक धरोहर बन चुका है। इतना ही नहीं इस भवन में अब सिविल सर्जन कार्यालय भी संचालित हो रहा है।

इन्होंने रखी थी आधारशिला

इस हॉस्पिटल का निर्माण तत्कालीन गवर्नर जनरल लाॅर्ड इरविन के रांची आगमन को लेकर राजा बलदेव दास बिड़ला ने कराया था। 1928 में इसकी आधारशिला रखी थी। निर्माण के पांचवें वर्ष यानी 9 अक्तूबर 1933 को इस अस्पताल को यहां के आम लोगों को समर्पित कर दिया गया। मालूम हो कि 1928 में इरविन के कार्यकाल में ही सात सदस्यीय साइमन कमीशन का दल मुंबई पहुंचा था। महात्मा गांधी की दांडी यात्रा भी इरविन के कार्यकाल में ही हुई थी।

सदर अस्पताल परिसर की इस प्रसिद्ध इमारत के री-स्टोरेशन (पुनर्निर्माण) कार्य पूरा हो चुका है। योजना के दूसरे चरण में इमारत की अंदरूनी दीवारों की ऊपरी परत को खरोंचकर हटाते हुए उस पर विशेष पारंपरिक लेप चढ़ाया गया है। इस ऐतिहासिक इमारत की मुख्य विशेषता इसकी विशाल संरचना है, जिसमें बाहर लोहे का तथा भीतर लकड़ी का बना बड़ा मुख्य द्वार, बड़ी-बड़ी खिड़कियां और विशाल रोशनदान शामिल हैं।इमारत के भीतर बड़े और ऊंचे हॉल हैं, जबकि मुख्य इमारत के शीर्ष पर बनी मेहराब (अर्ध-वृत्ताकार छत) और ब्रिटिश शैली में निर्मित ऊपरी चहारदीवारी इसके पुरातात्विक महत्व को पहली ही नजर में बयां करती है।

इस इमारत का एक बड़ा आकर्षण और ऐतिहासिक साक्ष्य यहां लगी समर्पित काले ग्रेनाइट की एक आदमकद पट्टिका (शिलालेख) है। यह शिलालेख इस अस्पताल के लंबे इतिहास, मेडिकल क्षेत्र के ऐतिहासिक अनुभवों और कई महत्वपूर्ण अवसरों का मूक गवाह रहा है। ऐतिहासिक यादों को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखने के उद्देश्य से अस्पताल से जुड़े नाम, प्रतीक और शील-चिह्नों को बिना किसी फेरबदल के अधिसूचित किया गया है। री-स्टोरेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस ऐतिहासिक ग्रेनाइट पट्टिका को पुनः उसी स्थान पर लगाया गया है। परियोजना का जीर्णोद्धार झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड और मेसर्स एसएस एंटरप्राइजेज ने कराया है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।