
रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग में पीएचडी कोर्स वर्क का शुभारंभ
रांची : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय, नागपुरी विभाग में बुधवार को पीएचडी कोर्स वर्क का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में संकायाध्यक्ष डॉ अर्चना कुमारी दुबे, विश्वविद्यालय के एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ किशोर सुरिन, खोरठा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कुमारी शशि, प्राध्यापक डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, डॉ रीझु नायक तथा कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ मनोज कच्छप उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ सुदेश कुमार साहू ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का शोध कार्य अपनी गुणवत्ता और गंभीरता के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक अर्थों में शोध वही है जो अब तक अज्ञात तथ्यों की खोज कर ज्ञान की नई संभावनाओं को सामने लाए। शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के विकास का सशक्त साधन है। उन्होंने शोधार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने विषय के प्रति जिज्ञासा, अनुशासन और मौलिक दृष्टि के साथ अध्ययन करें, तभी उनका शोध समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि और संकायाध्यक्ष डॉ अर्चना कुमारी दुबे ने कहा कि शोध कार्य को ईमानदारी, प्रतिबद्धता और बौद्धिक निष्ठा के साथ पूरा करना चाहिए। ऐसा शोध ही सार्थक माना जाता है जो समाज और राष्ट्र के समक्ष नई सोच और नई दिशा प्रस्तुत कर सके।
एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ किशोर सुरिन ने कहा कि नागपुरी भाषा और साहित्य के विकास की दिशा में यह पीएचडी कोर्स वर्क एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पड़ाव है। इसके माध्यम से शोधार्थियों को शोध की पद्धति, दृष्टिकोण तथा नई संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि शोधार्थियों को अपने शोध कार्य की गुणवत्ता और मानकों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शोध ही अकादमिक जगत में स्थायी पहचान बनाता है। खोरठा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कुमारी शशि ने शोध के विभिन्न आयामों और पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्राध्यापक डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शोध प्रारंभ करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि पीएचडी कोर्स वर्क का उद्देश्य क्या है। जब शोधार्थी शोध की मूल भावना और पद्धति को समझ लेते हैं, तभी वे एक सार्थक और प्रभावशाली शोध कार्य कर पाते हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ मनोज कच्छप ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ रीझु नायक ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पीएचडी कोर्स वर्क में पंजीकृत सभी शोधार्थी उपस्थित थे।
