
अपनी दमदार अभिनय क्षमता और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले रणदीप हुड्डा इन दिनों वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश 2’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘सरबजीत’ और ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय और जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से दर्शकों को प्रभावित कर चुके रणदीप का कहना है कि पिता बनने के बाद उनकी जिंदगी में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं।
रणदीप ने बताया कि बेटी न्योमिका के जन्म के बाद उनकी सोच और जीवनशैली दोनों में बदलाव आया है। उनके अनुसार अब जीवन में पहले की तुलना में अधिक ठहराव, जिम्मेदारी और भावनात्मक परिपक्वता महसूस होती है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर बिना किसी शर्त वाले प्रेम को समझने लगे हैं। काम के बाद जल्द घर लौटने की इच्छा भी पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
बेबाकी के नुकसान भी हैं, लेकिन सच बोलना बेहतर
रणदीप हुड्डा हमेशा से अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी में कूटनीति या डिप्लोमेसी का महत्व जरूर है, लेकिन वह खुद इस गुण में बहुत अच्छे नहीं हैं। उनका मानना है कि सच बोलना और अपने स्वभाव के अनुसार जीना ज्यादा आसान है, बजाय इसके कि व्यक्ति लगातार दिखावे और झूठ का सहारा ले। उन्होंने कहा कि बेबाक होने के कुछ नुकसान जरूर होते हैं, लेकिन खुद को बदलकर जीना उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है। जो लोग उनके साथ काम करना चाहते हैं, वे उनके व्यक्तित्व को समझकर ही जुड़ते हैं।
‘इंस्पेक्टर अविनाश’ का रोल पहले ठुकराया था
रणदीप ने खुलासा किया कि शुरुआत में वह ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने के पक्ष में नहीं थे। उन्हें लगा था कि लगातार ऐसे किरदार करने से वह टाइपकास्ट हो सकते हैं। हालांकि निर्देशक नीरज पाठक द्वारा कहानी सुनाने के बाद उन्होंने यह भूमिका स्वीकार कर ली। उनका मानना है कि टाइपकास्टिंग फिल्म इंडस्ट्री की एक वास्तविक चुनौती है, लेकिन कलाकार के पास हमेशा यह विकल्प होता है कि वह नए और अलग किरदारों का चुनाव करे।
अभिनय के साथ लेखन में भी बढ़ी दिलचस्पी
रणदीप ने बताया कि फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के दौरान निर्माता और निर्देशक की भूमिका निभाने के बाद उनकी रुचि लेखन की ओर भी बढ़ी है। उन्होंने दो स्क्रिप्ट्स लिखी हैं और कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार लेखन ने उन्हें रचनात्मक रूप से व्यस्त और उत्साहित रखा है। जब वह अभिनय नहीं कर रहे होते, तब भी नई कहानियां लिखने और विकसित करने में उन्हें बेहद आनंद आता है।

