स्किन शो पर क्या सोचती हैं रश्मिका मंदाना? जाह्नवी कपूर की ‘पेड्डी’ को लेकर छिड़ी बहस के बीच कही ये बात

Manu Shrivastava
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रश्मिका मंदाना ने फिल्मों में स्किन शो और अभिनेत्रियों की निजी सीमाओं को लेकर अपनी राय रखी है। अभिनेत्री का कहना है कि वह पर्दे पर जरूरत से ज्यादा अंग प्रदर्शन करने में सहज महसूस नहीं करतीं। उन्होंने यह भी बताया कि वह ऐसे निर्देशकों के साथ काम करना पसंद करती हैं, जो उनकी पसंद और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करते हैं। रश्मिका की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब फिल्मों में अभिनेत्रियों के चित्रण को लेकर बहस चल रही है।

स्किन शो को लेकर रश्मिका मंदाना ने क्या कहा?

रश्मिका मंदाना ने करण जौहर के साथ बातचीत के दौरान इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। यह बातचीत ‘कॉफी विद करण’ के नौवें सीजन से जुड़ी है। रश्मिका ने स्पष्ट किया कि किसी किरदार की मांग के बावजूद वह जरूरत से ज्यादा अंग प्रदर्शन करने में सहज नहीं रहतीं। उनके लिए यह जरूरी है कि फिल्म के निर्देशक उनकी सहजता और पसंद को समझें। अभिनेत्री के मुताबिक, वह अपनी सीमाओं को लेकर स्पष्ट हैं और उन निर्देशकों के साथ काम करना चाहती हैं, जो उनकी बात का सम्मान करते हैं।

जाह्नवी कपूर की ‘पेड्डी’ को लेकर क्यों हुई चर्चा?

यह चर्चा राम चरण की आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के चित्रण को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आई है। फिल्म में जाह्नवी के लुक और उनके किरदार को लेकर कुछ दर्शकों ने सवाल उठाए। आलोचकों का तर्क था कि पर्दे पर उनके किरदार को किस तरह पेश किया जा रहा है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इसी संदर्भ में अभिनेत्रियों की पसंद, कपड़ों और फिल्मों में उनके चित्रण को लेकर बहस तेज हुई।

विजय देवरकोंडा से भी सलाह लेती हैं रश्मिका

रश्मिका ने यह भी बताया कि फिल्म में किसी दृश्य या पोशाक को लेकर असहजता होने पर अपनी बात रखना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है। विजय देवरकोंडा ने भी इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कलाकारों के लिए अपनी आपत्ति जाहिर करना आसान नहीं होता। रश्मिका ने उनकी बात से सहमति जताई। उन्होंने बताया कि वह कभी-कभी ऐसे मामलों में विजय से चर्चा करती हैं और अपनी बात रखने से पहले उनकी राय भी लेती हैं।

फिल्मों में कलाकारों की सहमति पर नई बहस

रश्मिका के बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर चर्चा को फिर से सामने ला दिया है। सवाल यह है कि निर्देशक अपनी कहानी और किरदार की जरूरतों को पूरा करते हुए कलाकारों की सहजता का ध्यान कैसे रख सकते हैं। इस बहस में कलाकारों की सहमति, आपसी बातचीत और पेशेवर सम्मान जैसे पहलू अहम हैं।

 

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