रश्मिका मंदाना के कपड़ों और इंटीमेट सीन पर विजय देवरकोंडा ने कही बड़ी बात, बोले- कलाकारों को हो इनकार करने की आजादी

Manu Shrivastava
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अभिनेत्री रश्मिका मंदाना और अभिनेता विजय देवरकोंडा ने फिल्मों में कलाकारों की निजी पसंद और सीमाओं को लेकर अपनी राय रखी है। करण जौहर के चर्चित चैट शो ‘कॉफी विद करण’ के नौवें सीजन में पहुंचे इस जोड़े ने बताया कि कलाकारों को अपनी असहजता जाहिर करने का अधिकार मिलना चाहिए। विजय का मानना है कि किसी कलाकार को खुलासा करने वाले कपड़े पहनने या अंतरंग दृश्य करने से इनकार करने पर गैर-पेशेवर नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं, रश्मिका ने बताया कि वह अपने कपड़ों और दृश्यों को लेकर कुछ सीमाएं तय रखती हैं।

विजय देवरकोंडा ने कलाकारों की आजादी पर क्या कहा?

विजय देवरकोंडा ने इस बात पर जोर दिया कि कलाकारों को अपनी पसंद के अनुसार किसी दृश्य या पोशाक के लिए मना करने की आजादी होनी चाहिए। कई बार कलाकार फिल्म के लिए पहले ही सहमति दे चुके होते हैं, लेकिन शूटिंग के दौरान किसी दृश्य को लेकर असहज महसूस कर सकते हैं। ऐसे में उनकी परेशानी को समझना जरूरी है। किसी कलाकार का अपनी सीमा बताना उसे गैर-पेशेवर नहीं बनाता।

रश्मिका मंदाना को क्यों पसंद नहीं अंग प्रदर्शन?

बातचीत के दौरान रश्मिका ने बताया कि व्यावसायिक फिल्मों में कई बार ऐसे कपड़े पहनने पड़ते हैं, जिनमें कलाकार सहज महसूस नहीं करते। उन्होंने कहा कि कुछ चीजों को लेकर उनकी अपनी सीमाएं हैं। बिकिनी जैसे परिधानों की जरूरत वाले किरदारों के मामले में भी वह अपनी सहजता को महत्व देती हैं। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि वह जरूरत से ज्यादा अंग प्रदर्शन करने में सहज नहीं हैं और अपनी पसंद के अनुसार ही काम करना चाहती हैं।

निर्देशकों के साथ काम करते समय रखती हैं ये शर्त

रश्मिका ने आगे बताया कि व्यावसायिक फिल्मों में ऐसे परिधान या दृश्य हो सकते हैं, जिन्हें लेकर कलाकार पूरी तरह सहज न हों। हालांकि, वह अपने लिए कुछ सीमाएं तय करती हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, वह ऐसे निर्देशकों के साथ काम करना पसंद करती हैं, जो उनकी पसंद और फैसलों को समझते हैं। उनके अनुसार, कई निर्देशक उनकी सीमाओं का सम्मान भी करते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में क्यों जरूरी है यह चर्चा?

विजय और रश्मिका की बातों ने फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सहमति, निजी पसंद और पेशेवर सम्मान पर चर्चा को फिर सामने ला दिया है। रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ कलाकारों की सहजता का ध्यान रखना भी जरूरी है, ताकि वे बिना दबाव के अपनी बात रख सकें।

 

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