रांची: रिम्स में करोड़ों रुपये के आधुनिक उपकरण रख-रखाव और मैनपावर की कमी के कारण धूल फांक रहे हैं, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। अस्पताल के नए भवन में लगभग 2.49 करोड़ रुपये की लागत से 14 अलग-अलग तरह की आधुनिक स्टरलाइजेशन मशीनें खरीदी गई थीं, ताकि ऑपरेशन के बाद इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को वैज्ञानिक तरीके से संक्रमण मुक्त किया जा सके। हालांकि, एजेंसी और मैनपावर के अभाव में नए भवन का यह सेंट्रल स्टरलाइजेशन सर्विसेज डिपार्टमेंट (CSSD) पिछले कई महीनों से ठप पड़ा हुआ है।
इसके चलते ऑपरेशन थिएटर और विभिन्न विभागों के उपकरणों को स्टरलाइज करने के लिए ऑटो (किराये की गाड़ी) के माध्यम से लगभग 500 मीटर दूर पुराने भवन स्थित सीएसएसडी सेंटर भेजा जा रहा है, जिससे न केवल रोजाना ₹200 का अतिरिक्त खर्च हो रहा है, बल्कि उपकरणों के आने-जाने में होने वाली देरी के कारण कई बार ऑपरेशनों में भी विलंब हो जाता है। लैब विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार के अनुसार, नई मशीनें और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद संचालन एजेंसी की कमी और कार्यरत पुरानी एजेंसी द्वारा हाथ खड़े कर देने की वजह से इन उपकरणों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

