
अभिनेत्री और पर्यावरण संरक्षण की मुखर समर्थक सैयामी खेर ने महाराष्ट्र के नाशिक में लगभग 200 साल पुराने पेड़ों को काटे जाने पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की है। उनके घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित इन ऐतिहासिक पेड़ों की कटाई ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। सैयामी का मानना है कि यह केवल पेड़ों की कटाई का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक सोच, विकास की परिभाषा और पर्यावरण के प्रति हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
‘पेड़ों का महत्व सिर्फ निबंधों तक क्यों?’
सैयामी ने अपने बयान में कहा कि बचपन से बच्चों को स्कूलों में पेड़ों और पर्यावरण के महत्व के बारे में पढ़ाया जाता है। पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और विद्यार्थियों से पेड़ों की रक्षा पर निबंध लिखवाए जाते हैं। लेकिन बड़े होने के बाद यही मूल्य सबसे पहले भुला दिए जाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग 200 साल पुराने पेड़ों को काटने का फैसला लेते हैं, उनके कार्यालय उन्हीं स्थानों पर बना दिए जाने चाहिए जहां ये पेड़ खड़े थे, ताकि वे बिना छाया और प्राकृतिक ठंडक के गर्मी का वास्तविक अनुभव कर सकें।
विकास और पर्यावरण साथ-साथ क्यों नहीं?
सैयामी खेर ने सवाल उठाया कि आखिर हमने यह मानना क्यों शुरू कर दिया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी हैं। उनके अनुसार, दो शताब्दियों से खड़ा कोई पेड़ सिर्फ लकड़ी या पत्तों का समूह नहीं होता, बल्कि वह इतिहास, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे पेड़ों की भरपाई केवल नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती।
पर्यावरण संरक्षण के लिए आवाज उठाने वाले सितारे
बॉलीवुड में कई कलाकार पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपनी आवाज उठाते रहे हैं। दीया मिर्जा वृक्ष संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े अभियानों का समर्थन करती हैं। ऋचा चड्ढा भी पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान के खिलाफ कई बार प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठा चुकी हैं। वहीं सयाजी शिंदे वृक्षारोपण और वृक्ष संरक्षण अभियान का बड़ा चेहरा बन चुके हैं। श्रद्धा कपूर भी मुंबई के हरित क्षेत्रों को बचाने के समर्थन में कई बार अपनी राय रख चुकी हैं। सैयामी खेर की यह प्रतिक्रिया एक बार फिर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को उजागर करती है।

