
दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री समांथा रुथ प्रभु ने अपनी ऑटोइम्यून बीमारी मायोसिटिस के साथ संघर्ष को लेकर भावुक खुलासा किया है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने बताया कि इस बीमारी ने न केवल उनकी शारीरिक स्थिति को प्रभावित किया, बल्कि जीवन को देखने का उनका नजरिया भी पूरी तरह बदल दिया। सामंथा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह शोहरत और लोगों की प्रशंसा की आदी हो चुकी थीं। उनका आत्मविश्वास काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता था कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं।
फेम से ज्यादा जरूरी है आत्मिक संतुलन
सामंथा ने कहा कि मायोसिटिस से जूझने के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि जीवन केवल बाहरी सफलता और लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि बीमारी ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया, लेकिन उसी प्रक्रिया ने उन्हें अपने वास्तविक अस्तित्व को समझने का अवसर भी दिया। अभिनेत्री के अनुसार, जब शरीर साथ देना बंद कर देता है तो इंसान को अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मा की ओर देखना पड़ता है। इस कठिन दौर ने उन्हें विनम्र बनाया और जीवन के वास्तविक मूल्यों को समझाया।
दर्दभरा सफर, लेकिन मिली नई ताकत
अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि बीमारी से उबरने का सफर बेहद लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा। हालांकि इस दौरान परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का प्यार उनके लिए बड़ी ताकत बना। उन्होंने कहा कि फैंस की दुआओं और समर्थन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का साहस दिया। अब वह पहले की तुलना में अधिक शांत, संतुलित और जागरूक महसूस करती हैं। सामंथा का कहना है कि आज उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी सेहत है और वही उनके जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति भी है।

