

मुंबई: सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को आगाह किया कि समापन नीलामी सत्र (सीएएस) यानी बाजार बंद होने के बाद शेयर के अंतिम भाव तय करने की व्यवस्था को ‘‘बदनाम’’ करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ पूंजी बाजार नियामक सख्ती से कार्रवाई करेगा।





सीएएस को तीन अगस्त को लागू किए जाने के बाद बाजार भागीदारों की ओर से जताई गई विभिन्न चिंताओं के बीच पांडेय ने कहा कि सीएएस में हेरफेर पकड़ने की सेबी की क्षमता उस पुरानी मात्रा भारांश औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) प्रणाली की तुलना में अधिक है, जिसकी जगह इसे लागू किया गया है।
पांडेय ने यहां उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सीएएस में हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं। सीएएस पारदर्शिता के लिए है। अगर किसी को लगता है कि वे नई प्रणाली को बदनाम करने के लिए इसमें हेरफेर करेंगे, तो वे मुसीबत में पड़ेंगे।’’
सेबी प्रमुख ने कहा कि सीएएस व्यवस्था में भागीदारी बढ़ रही है और उन्होंने विशेष रूप से म्यूचुअल फंड तथा अपने खाते से कारोबार करने वाले लोगों द्वारा इसे अपनाए जाने का उल्लेख किया।
पांडेय ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सीएएस में भागीदारी में सुधार हो रहा है और आगे भी इसमें सुधार होगा। हम भागीदारी में आ रही बाधाओं को देख रहे हैं।’’
सेबी के अनुसार, दुनिया के प्रमुख बाजारों में पिछले दो वर्षों तक सीएएस जैसी व्यवस्था अपनाई गई है।
सेबी ने बाजार में हेरफेर रोकने और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सीएएस शुरू किया है। इस व्यवस्था के तहत कारोबार समाप्त होने से पहले निर्धारित समयावधि में खरीद और बिक्री के ऑर्डर को तत्काल निष्पादित करने के बजाय एकत्र किया जाता है और नीलामी आधारित ऑर्डर मिलान प्रक्रिया के तहत उनको मिलाया जाता है।
इस व्यवस्था की शुरुआत के बाद कुछ समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें सेबी प्रमुख पहले ‘‘शुरुआती दिक्कतें’’ बता चुके हैं।
उन्होंने बाजार भागीदारों से नई व्यवस्था को समझने के लिए अधिक प्रयास करने और सीएएस को समर्थन देने वाली प्रौद्योगिकी प्रणालियों को अपनाने की भी अपील की थी।
इस बीच, पांडेय ने कहा कि सेबी वायदा एवं विकल्प बाजार में खुदरा निवेशकों के दांव के प्रदर्शन पर बृहस्पतिवार को अधिक विस्तृत और अद्यतन आंकड़े जारी करेगा।
गौरतलब है कि सेबी के इसी तरह के एक पिछले अध्ययन में सामने आया था कि खुदरा निवेशकों के 90 प्रतिशत से अधिक सौदों में नुकसान हुआ। ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि कुछ लोगों ने बाजार में नुकसान के कारण आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाए। इसके बाद सेबी ने बाजार में सट्टेबाजी कम करने और निवेशकों की सुरक्षा के उद्देश्य से कई उपाय किए।
इस महीने की शुरुआत में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वायदा-विकल्प कारोबार में व्यक्तिगत निवेशकों का नुकसान वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1.1 लाख करोड़ रुपये था।
सम्मेलन को पहले संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि सेबी जल्द ही बाजारों में कृत्रिम मेधा (एआई)/मशीन लर्निंग के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। इसमें जवाबदेही और संचालन संबंधी नियंत्रण तय करने के लिए विभिन्न स्तर वाली व्यवस्था होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस व्यवस्था में ‘किल स्विच’ और ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ नियंत्रण के साथ-साथ डेटा नियंत्रण भी जरूरी होंगे।’’
पांडेय ने यह भी स्पष्ट किया कि विनियमित इकाइयां उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रत्येक एआई उपकरण के लिए जिम्मेदार होंगी। इसमें निवेशकों के डेटा की निजता, सुरक्षा और उसकी सत्यता जैसे पहलू भी शामिल हैं।
