

नयी दिल्ली: बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को कहा कि नियामक निर्गम से जुटाई गई राशि के इस्तेमाल की निगरानी और उसके खुलासे की व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है।





उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य समय पर जानकारी उपलब्ध कराना और अनुपालन प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
इंस्टीट्यूट ऑफ डायरेक्टर्स के वार्षिक निदेशक सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि पारदर्शिता का मतलब केवल किसी कंपनी द्वारा दी गई जानकारी की मात्रा नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वह जानकारी निवेशकों को जरूरी बातों को समझने में कितनी मदद करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम निर्गम से जुटाई गई राशि के इस्तेमाल की निगरानी और उसके खुलासे की व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। इसका उद्देश्य समय पर खुलासा सुनिश्चित करना और अनुपालन प्रक्रिया को सुगम बनाना है।’’
पांडेय ने कहा कि किसी कंपनी द्वारा जानकारी का खुलासा कर देने भर से यह जरूरी नहीं है कि वह पारदर्शी हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वास्तविक पारदर्शिता जानकारी की मात्रा में नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, समयबद्धता और उपयोगिता में है।’’
उन्होंने कहा कि सेबी ने महत्वपूर्ण घटनाओं और सूचनाओं के खुलासे से जुड़े नियमों को लगातार मजबूत किया है। सेबी ने संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन से जुड़े नियमों को भी और स्पष्ट करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कंपनियों के लिए नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होंगे तथा निवेशकों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय भी बने रहेंगे।
नियामकीय अनुपालन के बारे में उन्होंने कहा कि सुशासन के लिए नियमों का अनुपातिक होना और अनावश्यक दोहराव से बचना भी जरूरी है।
