लाखों के कॉरपोरेट पैकेज को ठुकराकर देश सेवा की चुनी राह, जानें लखनऊ के शारदेंदु तिवारी की कहानी

लखनऊ के शारदेंदु तिवारी ने 46 लाख का कॉरपोरेट पैकेज छोड़ सेना चुनी। सात असफल प्रयासों के बाद आठवीं कोशिश में एसएसबी पास कर लेफ्टिनेंट बने।

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रांची: लाखों के कॉरपोरेट पैकेज को ठुकराकर देश सेवा की राह चुनने वाले लखनऊ के 27 साल के शारदेंदु तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि लगन और दृढ़ संकल्प के आगे असफलताएं भी घुटने टेक देती हैं। हरियाणा के चरखी दादरी स्थित केंद्रीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पंजाब से कंप्यूटर साइंस में बीटेक और एमटेक करने वाले शारदेंदु ने कॉरपोरेट जगत में एक सफल करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में लंबा अनुभव हासिल करते हुए अमेजन जैसी दिग्गज कंपनी में क्लाउड इंजीनियर के रूप में 46 लाख का शानदार सालाना पैकेज प्राप्त किया। हालांकि, इस आकर्षक पैकेज और आरामदायक कॉरपोरेट जिंदगी के बावजूद उनका असली सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा करने का था।

सेना में अधिकारी बनने का यह सफर शारदेंदु के लिए आसान नहीं रहा और उन्हें लगातार सात प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा। लगातार मिल रही असफलताओं से निराश होने के बजाय उन्होंने हर हार को एक सीख की तरह लिया और अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार, आठवें प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने टेक्निकल एंट्री स्कीम के तहत एसएसबी क्रैक कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर सफलता हासिल की। हाल ही में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), गया से पास आउट होकर उन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर अपने और अपने परिवार के सपने को साकार किया है। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो असफलताओं से निराश होकर अपने लक्ष्यों को छोड़ देते हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।