Latest Newsझारखंडपर्यटन मानचित्र पर उभरी शिव पहाड़ी गुफा, गढ़वा को मिली नई पहचान

पर्यटन मानचित्र पर उभरी शिव पहाड़ी गुफा, गढ़वा को मिली नई पहचान

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Garhwa Has Got a New Identity : गढ़वा जिले के लिए यह एक अच्छी खबर है। जिले के 26 चिह्नित पर्यटन स्थलों की सूची में अब भवनाथपुर प्रखंड के पंडरिया पंचायत स्थित ऐतिहासिक और रहस्यमयी शिव पहाड़ी गुफा को भी शामिल कर लिया गया है।

पर्यटन विभाग (Tourism Department) की सूची में इसे शिव मंदिर, भवनाथपुर के नाम से दर्ज किया गया है। इस फैसले से क्षेत्र के लोगों में काफी खुशी और उत्साह देखने को मिल रहा है।

पर्यटन विभाग करेगा स्थल का निरीक्षण

सूची में शामिल होने के बाद अब पर्यटन विभाग की टीम जल्द ही स्थल का दौरा करेगी। इस दौरान गुफा की भौगोलिक स्थिति, धार्मिक महत्व और पर्यटन की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

लोगों को उम्मीद है कि इसके बाद इस स्थल का विकास तेजी से होगा और यह एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।

लंबे समय से चल रही थी मांग

शिव पहाड़ी गुफा मंदिर कमेटी, पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही और जिला परिषद सदस्य रजनी शर्मा की ओर से इस स्थल को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस दिशा में विधायक अनंत प्रताप देव की भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है।

उन्होंने इस गुफा के महत्व को सदन में उठाया और लगातार प्रयास करते रहे। मंदिर विकास समिति ने उन्हें बधाई देते हुए आभार जताया है।

प्राकृतिक रूप से अनोखी है शिव पहाड़ी गुफा

यह गुफा प्रखंड मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर सरइया गांव के पास, भवनाथपुर चूना पत्थर खदान समूह के समीप स्थित है।

गुफा की खास बात यह है कि श्रद्धालु मात्र डेढ़ फीट चौड़े प्राकृतिक रास्ते से एक-एक कर भीतर प्रवेश करते हैं और करीब 150 फीट नीचे उतरकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं। बाहर से ठोस दिखने वाला यह पहाड़ अंदर से पूरी तरह खोखला है, जो इसे और भी रहस्यमयी बनाता है।

स्थानीय मान्यताएं और धार्मिक आस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 200 साल पहले एक व्यक्ति को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन देकर बताया था कि वे शिव पहाड़ी के भीतर विराजमान हैं।

इसके बाद गुफा की खोज हुई और तब से यहां पूजा-पाठ की परंपरा चली आ रही है। गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बना शिवलिंग श्रद्धालुओं (Devotees) की आस्था का केंद्र है।

महाशिवरात्रि पर लगता है भव्य मेला

महाशिवरात्रि के मौके पर यहां दो दिवसीय मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन महीने में कांवड़ यात्रा के जरिए जलाभिषेक भी किया जाता है।

गुफा के भीतर ‘काशी करवट’ नामक स्थान है, जहां सूर्य की रोशनी सीधे पहुंचती है। समय-समय पर अखंड कीर्तन का आयोजन भी होता है।

पर्यटन से खुलेगा विकास का रास्ता

वर्तमान में मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार गुप्ता, उपाध्यक्ष इंद्रजीत कुमार और सचिव रामविजय साह सहित अन्य सदस्य इसकी देखरेख कर रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि अगर पर्यटन विभाग (Tourism Department) द्वारा समुचित विकास किया गया, तो यह स्थल न केवल भवनाथपुर बल्कि पूरे गढ़वा जिला के लिए एक बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है और भवनाथपुर को नई पहचान दिला सकता है।

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