नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को स्वयंभू प्रवचनकर्ता आसाराम की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने अपनी बीमार पत्नी से मिलने जाने के लिए 2013 के गांधीनगर दुष्कर्म मामले में जमानत देने से इनकार करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 85 वर्षीय आसाराम के वकील को जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। पीठ ने कहा कि आसाराम को जोधपुर में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने पहले ही 26 अक्टूबर तक पैरोल दी हुई है। आसाराम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि आसाराम को मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ा था और उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है। आसाराम को जोधपुर और गांधीनगर में दर्ज दुष्कर्म के दोनों मामलों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
शीर्ष अदालत आसाराम की दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें से एक गुजरात के मामले में अंतरिम जमानत के लिए थी, जबकि दूसरी जोधपुर में दर्ज मामले में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखने के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील थी। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखने के राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आसाराम की अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि उसके आत्मसमर्पण करने के बाद अदालत ‘‘कानून के एक स्पष्ट प्रश्न’’ पर सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा कि अदालत साक्ष्यों और मामले के रिकॉर्ड की पड़ताल कर चुकी है और अपील में कोई ठोस आधार नजर नहीं आता।
दवे ने दलील दी कि आसाराम को अन्य आरोपों में दोषी ठहराया जा सकता है, लेकिन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह आरोप बनता ही नहीं है। पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘हमें पक्षकारों के वकीलों ने बताया है कि दोषी याचिकाकर्ता पैरोल पर है। उसे 20 दिन की पैरोल दी गई है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘पैरोल की अवधि समाप्त होने और उसके आत्मसमर्पण करने के बाद हम इस अपील पर आगे सुनवाई करेंगे। मामले को 17 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’’ पीठ ने रजिस्ट्री को अधीनस्थ अदालत के मुकदमे से संबंधित डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया। शुरुआत में दवे ने कहा कि राजस्थान के मामले में शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने नोटिस जारी किए थे और इस पीठ के समक्ष पहली बार अपील सूचीबद्ध हुई है।
राजस्थान और गुजरात की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता को राजस्थान और गुजरात, दोनों राज्यों में दोषी ठहराया गया है। आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों से पैरोल के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। मेहता ने कहा कि इस याचिका को खारिज किए जाने के बाद आसाराम ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। मेहता ने बताया कि इसके बाद आसाराम ने राजस्थान उच्च न्यायालय में एक और याचिका दायर की, जिस पर उसे 20 दिन की पैरोल दी गई।


