
Supreme Court on the Convenience of Girls : नई दिल्ली में शुक्रवार को Supreme Court ने सामाजिक दृष्टि से एक अहम फैसला सुनाया।
कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग और सुरक्षित Toilet की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि लड़कियों का अधिकार है।
अलग टॉयलेट बनाना होगा जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग Toilet होना चाहिए। यदि किसी स्कूल में यह व्यवस्था नहीं है, तो उसे जल्द से जल्द पूरा करना होगा।
Court ने यह भी कहा कि निजी स्कूल अगर इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
सैनिटरी पैड देना भी अनिवार्य
अदालत ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा कि हर स्कूल में लड़कियों को Sanitary Pads मुफ्त दिए जाएं।
कोर्ट का मानना है कि मासिक धर्म के समय सही सुविधा न मिलने से लड़कियों की पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है। इस कारण कई छात्राएं स्कूल आना भी छोड़ देती हैं।
संविधान से जुड़ा मामला बताया
Supreme Court ने कहा कि स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट न होना संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना अनुच्छेद 21, यानी जीवन और गरिमा के अधिकार का हिस्सा है।
राष्ट्रीय नीति का ड्राफ्ट तैयार
कोर्ट को यह भी बताया गया कि छात्राओं की Menstrual Hygiene सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है।
यह ड्राफ्ट सभी संबंधित पक्षों को राय के लिए भेजा गया है। चार सप्ताह के भीतर इस नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
याचिका के बाद आया फैसला
इस पूरे मामले में सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई थी कि देशभर के सरकारी और आवासीय स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाएं और उनके लिए अलग शौचालय की व्यवस्था हो।
पढ़ाई और सम्मान से जुड़ा मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि लड़कियों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो वे लड़कों की तरह पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बराबरी से हिस्सा नहीं ले पातीं। इससे उनकी गरिमा और निजता पर सीधा असर पड़ता है।
राज्यों को तुरंत कदम उठाने के निर्देश
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश को गंभीरता से लें और स्कूलों में जरूरी व्यवस्थाएं जल्द पूरी करें।
कोर्ट का मानना है कि यह फैसला लड़कियों की शिक्षा और सम्मान दोनों को मजबूत करेगा।
