महिला सैन्य अधिकारी स्थायी कमीशन की हकदार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार, सेना में लैंगिक समानता को बढ़ावा, भेदभावपूर्ण नियम खत्म, अब नेतृत्व भूमिकाओं के नए अवसर

Neeral Prakash
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नई दिल्ली : सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी स्थायी कमीशन प्राप्त करने की हकदार हैं। पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह अहम फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य पदोन्नति प्रक्रियाओं में मौजूद प्रणालीगत पूर्वाग्रह को गंभीरता से उजागर किया। अदालत ने टिप्पणी की कि महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करना, मौजूदा मूल्यांकन ढांचे में रचे-बसे भेदभाव को दर्शाता है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने स्थायी कमीशन के लिए प्रति वर्ष 250 महिला अधिकारियों की अधिकतम सीमा (कैप) को भी यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह सीमा पूरी तरह से मनमानी है और कोई अकाट्य (sacrosanct) नियम नहीं है।

अदालत के इस फैसले को सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़े और निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले के बाद अब महिला अधिकारी न केवल सेना में अपना दीर्घकालिक करियर बना सकेंगी, बल्कि उन वरिष्ठ और नेतृत्व वाले पदों को भी आसानी से संभाल सकेंगी, जो पहले मुख्य रूप से केवल पुरुषों तक ही सीमित थे।

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।