
- हमलोग संसदीय लोकतंत्र नहीं संसदीय सर्कस में जी रहे हैं
Supriyo Bhattacharya Statement : झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हम संसदीय लोकतंत्र नहीं, संसदीय सर्कस में जी रहे हैं।
प्रधानमंत्री संसद में बोल रहे थे कि हम किसी राज्य में किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होगी। तो ये परिसीमन का आधार क्या होगा। लोगों की संख्या होगी या फिर कार्यक्षेत्र की चौहद्दी होगी। जो संभावित आंकड़े दिख रहे थे, यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं, उसमें 40 बढ़ जायेगा। यानि 120 हो जायेगा। इसके पीछे राजनीतिक मंशा क्या है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में कह रहे थे कि पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है। लेकिन वे भूल गए थे कि ये व्यवस्था राजीव गांधी ने लागू की थी।
2011 में जब मनमोहन सिंह की सरकार महिला आरक्षण पर बिल लाते हैं तो भाजपा नेताओं का विरोध सामने आया था। अकेले बंगाल में 75 लाख महिलाओं का नाम काटा गया। 75 लाख महिलाओं को वोट देने से रोका गया। ये महिलाओं के साथ न्याय हुआ, सम्मान हुआ। आप लाना क्या चाहते हैं इस देश में। परिसीमन के पूर्व किसी राज्य से कंसल्टेशन किया। क्या झारखंड में हमें मालूम है कि किस पेड़ पर कुल्हाड़ी चलेगा।
बिहार के किस जिले को ढकेल दिया जायेगा। आपने राजनीतिक पार्टियों से भी बातचीत नहीं की। पूरी तरह से देश में संवैधानिक ढांचा है। उसमें ये प्रावधान भी किया गया कि 33 प्रतिशत आरक्षण अगले पंद्रह वर्षों के लिए ही होगा।
उन्होंने कहा कि घृणित मंशा के साथ कोई सत्ता पर है तो देश के लिए गंभीर समस्या है। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मैं क्रेडिट नहीं लेना चाहता। क्रेडिट तो उनको 2023 में दिया था और कहा था कि 2024 में लागू कर दीजिए। तब वे डर क्यों गए थे।

