
नई दिल्ली : सिलिकॉन वैली में छह अंकों की सैलरी और आलीशान जीवन का सपना हर भारतीय इंजीनियरिंग छात्र देखता है। लेकिन पुणे की 29 वर्षीय तन्वी पिसल की कहानी इस चमक-धमक के पीछे छिपे कड़वे सच को उजागर करती है। वर्तमान में एप्पल (Apple) के सैन जोस स्थित कार्यालय में यूएक्स (UX) डिजाइनर के रूप में कार्यरत तन्वी ने बताया कि अमेरिका में जीवन केवल सुविधाओं का नाम नहीं, बल्कि अनिश्चितता और निरंतर संघर्ष का दूसरा नाम है।
सोशल मीडिया के ग्लैमर से इतर है हकीकत
तन्वी की पेशेवर यात्रा पुणे से शुरू हुई थी, जहां उनका शुरुआती वेतन महज 3.5 लाख रुपये सालाना था। कड़ी मेहनत के दम पर वह कैलिफोर्निया पहुंचीं और आज उनका मुआवजा पैकेज 1 करोड़ रुपये से भी अधिक है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने खुलासा किया कि भारी-भरकम सैलरी के बावजूद वहां का जीवन मानसिक दबाव और असुरक्षा से भरा हुआ है। सोशल मीडिया पर जो ‘ग्लैमर’ दिखता है, हकीकत उससे कोसों दूर है।
तन्वी का यह सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्हें अक्टूबर 2025 में छंटनी (Layoff) का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह कैलिफोर्निया से न्यूयॉर्क एक स्टार्टअप में काम करने गईं, लेकिन वहां के अत्यधिक काम के दबाव यानी ‘9-टू-9’ कल्चर में फिट न होने के कारण उन्हें महज 12 दिनों के भीतर ही नौकरी से निकाल दिया गया। यह उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय था, क्योंकि ओपिटी (OPT) वीजा के तहत उनके पास नई नौकरी ढूंढने के लिए बहुत कम समय बचा था।नौकरी खोने के बाद तन्वी ने हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि वह रोजाना सुबह 4 बजे उठकर नौकरियों के लिए आवेदन करती थीं और डिजाइन पोजीशन के हिसाब से अपने आवेदनों को तैयार करने में घंटों बिताती थीं। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें एप्पल में स्थान मिला।
तन्वी का कहना है कि अमेरिका में लोग अकेलेपन, वीजा के दबाव और अत्यधिक महंगाई से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, “यहां हर कोई सर्वाइवल मोड में है।” उनकी यह कहानी उन छात्रों के लिए एक चेतावनी भी है जो केवल बाहरी चमक देखकर विदेश जाने का मन बनाते हैं। उनका अनुभव बताता है कि वहां करियर बनाने के लिए न केवल कौशल, बल्कि जबरदस्त मानसिक दृढ़ता की भी आवश्यकता होती है।

