Tusu Festival Organised at Morhabadi Ground: झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार (Governor Santosh Gangwar) ने कहा कि टुसू केवल एक लोक पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, किसान और मेहनत से गहराई से जुड़ा हुआ उत्सव है।
यह पर्व उस परिश्रम और उम्मीद का प्रतीक है, जो किसान पूरे साल खेतों में मेहनत करके फसल उगाने में लगाते हैं। फसल कटने के बाद किसान टुसू को मां लक्ष्मी के रूप में मानकर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

मोरहाबादी मैदान में धूमधाम से हुआ टुसू महोत्सव
राज्यपाल मंगलवार को Morabadi Ground में आयोजित टुसू महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन कुरमाली भाषा परिषद परिवार द्वारा किया गया था।
महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और पूरे मैदान में लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, पूर्व सांसद शैलेन्द्र महतो, केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियां मौजूद थीं।
इनके अलावा डॉ राजा राम महतो, शोहदर महतो, डॉ मीना महतो, जयंती मेहता, संजय मेहता और डॉ गोवर्धन मेहता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
83 फीट ऊंचा टुसू बना लोगों के आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में खूंटी जिले के अड़की और तामाड़ क्षेत्र से लाए गए कुल छह टुसू स्थापित किए गए थे। सभी टुसू बांस से बनाए गए थे और उन्हें रंग-बिरंगे रंगों से बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया था।
इनकी ऊंचाई 21 फीट से लेकर 83 फीट तक थी। सबसे ऊंचा 83 फीट का टुसू लोगों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा।
कार्यक्रम के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ राजाराम महतो ने कहा कि टुसू झारखंड की आत्मा है। यह पर्व नारी शक्ति, भाषा और संस्कृति को जोड़ता है।
उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों से यह महोत्सव लगातार मनाया जा रहा है, ताकि लोक परंपराएं जीवित रह सकें। उन्होंने टुसू पर्व (Tusu Festival) को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की जरूरत पर भी जोर दिया।




