अमेरिका की व्यापार जांच के दायरे में भारत भी, ‘अनुचित विदेशी प्रथाओं’ की होगी पड़ताल

अमेरिका ने भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ समेत कई देशों की व्यापार नीतियों की जांच शुरू की, अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर फोकस।

Vinita Choubey
2 Min Read
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वाशिंगटन : अमेरिका ने भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ जांच शुरू की है। इसका उद्देश्य उन ”अनुचित विदेशी प्रथाओं” की पता लगाना है जिनसे अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी) के तहत विभिन्न देशों की नीतियों, कार्यों तथा प्रथाओं की जांच शुरू करने की घोषणा की। यह जांच विनिर्माण क्षेत्रों में संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं अत्यधिक उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। जांच बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम के खिलाफ शुरू की गई है। यूएसटीआर ग्रीर ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि जांच के दौरान यह तय किया जाएगा कि इन देशों की नीतियां और प्रथाएं अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं और क्या वे अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालती हैं या उसे सीमित करती हैं।ग्रीर ने कहा, ” अमेरिका अब अपने औद्योगिक आधार को उन देशों के लिए बलिदान नहीं करेगा, जो अतिरिक्त उत्पादन एवं क्षमता की अपनी समस्याएं हमारे यहां निर्यात कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि यह जांच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस संकल्प को दर्शाती है, जिसके तहत महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं को फिर से अमेरिका में स्थापित करने एवं अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्रों में बेहतर वेतन वाली नौकरियां उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रीर ने कहा कि कई विदेशी अर्थव्यवस्थाओं में विनिर्माण क्षेत्रों में अत्यधिक उत्पादन क्षमता है और कई देशों में घरेलू खपत से अधिक वस्तुओं का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा, ” यह अतिरिक्त उत्पादन अमेरिका के घरेलू उत्पादन को प्रतिस्थापित कर देता है या फिर उन निवेशों एवं विस्तार को रोक देता है जो अन्यथा अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में हो सकते थे। कई क्षेत्रों में अमेरिका ने घरेलू उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा खो दिया है या विदेशी प्रतिस्पर्धियों से काफी पीछे रह गया है।”

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