एलपीजी संकट पर काबू पाने के प्रयास जारी: सुरेश गोपी

एलपीजी संकट पर केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि भारत के लिए अतिरिक्त गैस आपूर्ति के रास्ते खुल रहे हैं, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

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त्रिशूर (केरल): पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बृहस्पतिवार को कहा कि एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) संकट से निपटने के प्रयास जारी हैं और भारत के लिए अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के रास्ते खुल रहे हैं। गोपी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को संसद में एलपीजी संकट से जुड़े सवालों के जवाब दिए थे। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक संवेदनशीलता के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति से जुड़े कुछ मामलों का खुलासा नहीं किया जा सकता। गोपी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने सभी देशों से इस बारे में बात की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे ने जीवन को किस तरह प्रभावित किया है और छूट दिए जाने की मांग की है। मैं सटीक आंकड़े नहीं दे रहा लेकिन हमारे लिए अधिक एलपीजी प्राप्त करने के रास्ते खुल रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि अस्पतालों और श्मशान घाटों जैसी आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्रालय के तौर पर हमें लगता है कि स्थिति नियंत्रण में है लेकिन देश के बाहर के कई तकनीकी पहलुओं को नियंत्रित करना हमारे अधिकार में नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि एलपीजी संकट ने कई देशों में दैनिक जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।’’ गोपी ने कहा कि गैस की कीमत विनियमित करने के लिए एक तंत्र मौजूद है और इसके निर्देशों के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कीमत तय करने का अधिकार पेट्रोलियम कंपनियों को दिया गया है क्योंकि वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं। कहा, ‘‘आप यह कैसे कह सकते हैं कि चूंकि प्रधानमंत्री मोदी शासन संभाल रहे हैं इसलिए इसे वापस ले लिया जाना चाहिए? पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य हमारे लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर अन्य देशों के साथ युद्ध नहीं कर सकता।  यह भी कहा कि ज्यादातर लोगों की तरह वह भी युद्ध के खिलाफ हैं। गोपी ने कहा कि एलपीजी संकट से निपटने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।  कोविड-19 के दौरान प्रशासन को संकट प्रबंधन के लिए कदम उठाने का अधिकार था और यह केवल मंत्रालय पर निर्भर नहीं करता।
उन्होंने गैस की कमी के कारण रेस्तरां बंद होने के बारे में कहा कि इसका समाधान खोजने और उन्हें फिर से खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। संकट के विरोध में हड़तालें हो सकती हैं लेकिन इस गंभीर स्थिति में पूरी दुनिया को हड़ताल पर जाना पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि संकट के समय लोगों को संयम बरतना चाहिए, जैसा कि कोविड-19 के दौरान और युद्धकालीन परिस्थितियों में देखा गया था।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।