
अभिनेता वरुण धवन इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘है इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार सुर्खियों की वजह सिर्फ फिल्म का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके अभिनय शैली को लेकर हो रही बहस भी है। फिल्म देखने के बाद दर्शकों और समीक्षकों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों का मानना है कि फिल्म में दिखाई गई कॉमेडी 90 के दशक की लोकप्रिय शैली की याद दिलाती है, जिसे कभी डेविड धवन और गोविंदा की फिल्मों में खूब पसंद किया गया था।
गोविंदा-डेविड धवन स्टाइल से हो रही तुलना
फिल्म में वरुण धवन एक बार फिर रंगीन, हल्के-फुल्के और ओवर-द-टॉप कॉमिक अंदाज में नजर आए हैं। यही वजह है कि उनकी तुलना लगातार उनके पिता डेविड धवन और कॉमेडी के सुपरस्टार गोविंदा से की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई दर्शकों ने इस शैली को मनोरंजक बताया, वहीं कुछ लोगों ने इसे पुराना और दोहराव वाला करार दिया। इससे यह बहस शुरू हो गई है कि क्या आज के दर्शक इस तरह की पारंपरिक कॉमेडी को पहले जैसा प्यार देंगे।
गंभीर किरदारों में भी दिखा चुके हैं दम
वरुण धवन ने अपने करियर में ‘बदलापुर’, ‘अक्टूबर’ और ‘सुई धागा’ जैसी फिल्मों के जरिए अभिनय की अलग पहचान बनाई है। इन फिल्मों में उनके गंभीर और संवेदनशील किरदारों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा था। यही कारण है कि उनके प्रशंसक उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं में देखना पसंद करते हैं।
बदलते दौर में नए प्रयोग की जरूरत
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय और दर्शकों की नई पसंद को देखते हुए वरुण धवन को नए विषयों और अलग तरह के किरदारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इससे उनकी अभिनय क्षमता का दायरा और मजबूत हो सकता है।

