एक बेचैन भारत इस सड़ी हुई व्यवस्था की परतें उघाड़ रहा है

विष्णु नागर ने मौजूदा राजनीतिक हालात और बढ़ते प्रतिरोध पर टिप्पणी की। उन्होंने राहुल गांधी के साहिल मामले में हस्तक्षेप, स्कूलों की बदहाली और विपक्षी सक्रियता का उल्लेख किया।

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विष्णु नागर

ये एक नया ही भारत है। एकदम नया। 20 जुलाई के बाद धीरे-धीरे उभरता भारत। इसमें प्रतिरोध के इतने बिंदु सामने आ रहे हैं कि इसे संभालना मोदी- शाह की जोड़ी के लिए मुश्किल है।आज पेलेटगन से घायल साहिल की एफआईआर दर्ज करवाने खुद प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंच गए। समर्थकों की भारी भीड़ थाने में और थाने के बाहर जमा है। राहुल गांधी कह रहे हैं कि जब तक साहिल की एफआईआर दर्ज नहीं होगी,वे यहीं धरना देंगे। एक नया जंतर-मंतर शुरू हो सकता है।उधर काक्रोच जनता पार्टी के नेता कार्यकर्ता स्कूलों में पहुंच कर वहां की दयनीय दशा बता रहे हैं।कहीं स्कूल टूटे हुए हैं।कहीं पीने का पानी नहीं है। कहीं शौचालय गंदे हैं, बदबूदार हैं। कहीं दोपहर के भोजन में दाल के नाम पर दाल का पानी दिया जा रहा है। कहीं छत गिरने को है।

दिल्ली से लेकर राजस्थान आदि की सरकारें परेशान हैं। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तो सरकारी आदेश जारी करवाकर स्कूलों में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश बंद करवा दिया है।बाकी भाजपा सरकारें भी यही करेंगी।कहीं गुंडे स्कूल के अंदर जाने नहीं दे रहे हैं मगर प्रतिरोध बढ़ता जा रहा है। एक बेचैन भारत इस सड़ी हुई व्यवस्था की परतें उघाड़ रहा है। क्रांति नहीं हो रही है मगर जड़ता टूट रही है। लोग खुद अपना सशक्तिकरण करने के लिए आगे आ रहे हैं।इनका सारा खेल बिगड़ गया है।इस तरह की स्थिति की तो इन षड़यंत्रकारियों ने कल्पना भी नहीं की थी।

उधर कांग्रेस ने वंदेमातरम की भाजपाई खेल को चुनौती दे दी है। देशद्रोह की दियासलाई सिल गई है। सबसे ज्यादा मुश्किल में भाजपा है। भाजपा को ऐसी स्थिति से निबटने के लिए गुंडागर्दी के करवाने के अलावा और कुछ नहीं आता। उससे स्थिति और बिगड़ेगी ही,संभलेगी नहीं।अब संसद की कमी सड़क पूरी कर रही है। इस समय भाजपा सरकार का एक ग़लत कदम, कुचलने का उसका कुटिल इरादा उसी पर बेहद भारी पड़ सकता है। हिंदू- मुस्लिम युग गया अब तेल लेने! वंदेमातरम का नाम लेकर राजनीतिक सांसें लेना अब कठिन हो चला है।अब चुनाव आयोग को जेब में रखकर चुनाव जीतने का कोई अर्थ नहीं रहा।अब सारे कुचक्रों के असफल होने का समय पास आता जा रहा है।

ऐसे भारत में जीवन के इस मुकाम पर सांस ले सकूंगा, इसकी कल्पना नहीं की थी।यह हम जैसों की कल्पना से परे का सुंदर और सुंदर बनता हुआ संसार है।मैं इस समय भावुक हूं।सोशल मीडिया पर ऐसे दृश्य देखकर आंखें भर आती हैं। प्रतिरोध में कहीं भी, किसी भी रूप में शामिल सबको मेरा सलाम।उन छोटे बच्चे – बच्चियों को भी जो प्रतिरोध की ताकत बन रहे हैं।

लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।