

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और केरल के तिरुवंनतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को नये संसद भवन को ‘भावशून्य सम्मेलन केंद्र’ करार देते हुए कहा कि इसमें अपनेपन की कमी महसूस होती है तथा ये दूरियां हमारी राजनीति के ध्रुवीकरण को दर्शाती हैं। थरूर ने पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नयी किताब ‘हाउसिंग द रिपब्लिक: अ बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजधानी पर अपनी भौतिक छाप छोड़ने की एक खास इच्छा रही है’’, लेकिन साथ ही दलील दी कि सभी बदलाव जरूरी नहीं हैं।





उन्होंने कहा, ‘‘ नया संसद भवन वास्तव में एक भावशून्य सम्मेलन केंद्र जैसा प्रतीत होता है, और इसके कई कारण हैं… इसकी छत बहुत ऊंची है, जिससे आपसी जुड़ाव या आत्मीयता की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। पुराने चैंबर में एक अपनापन था जो बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता था। जबकि इसकी बनावट में एक तरह की दूरी है, जैसे पंखे के आकार की बनावट।’’ तिरुवनंतपुरम से चौथी बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे थरूर ने कहा, ‘‘एक तरह की दूरी बन गई है, जो लगभग हमारी राजनीति के ध्रुवीकरण का प्रतीक लगती है। इस बदलाव के साथ-साथ यह भी हुआ है।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन किया था। यह भवन सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स’ का हिस्सा है, जिसकी परिकल्पना औपनिवेशिक दौर की सरकारी इमारतों की जगह लेने के लिए की गई। थरूर (70) ने नये संसद भवन के डिजाइन की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अनौपचारिक बातचीत और अलग-अलग पार्टियों के बीच का वह आपसी तालमेल कम हो गया है, जो कभी संसद की पहचान हुआ करता था, विशेषकर सेंट्रल हॉल न होने की वजह से।
