नयी दिल्ली : भारत में तेजी से बढ़ते कला बाजार में जहां अब तक कई मंचों पर सैकड़ों कलाकृतियां पेश की जाती रहीं हैं वहीं अब एक बार में सिर्फ एक कलाकृति की नीलामी का नया प्रयोग शुरू होने जा रहा है। कला दीर्घा संचालक तुषार जिवराजका ने ‘वोल्ट ऊना’ नाम से एक विशेष नीलामी मंच शुरू किया है, जिसका मकसद दुर्लभ और महत्वपूर्ण कलाकृतियों को नीलामी में अलग पहचान देना है।

‘वोल्ट ऊना’ की शुरुआत रविवार को प्रसिद्ध भारतीय कलाकार तैयब मेहता की एक दुर्लभ कलाकृति की नीलामी के साथ होगी। इस मंच पर हर नीलामी में केवल एक कलाकृति पेश की जाएगी। उसका चयन दुर्लभता, उसके स्वामित्व के इतिहास और कला जगत में उसके महत्व के आधार पर किया जाएगा। हाल ही में भारतीय कलाकृतियों की बिक्री ने वैश्विक रिकॉर्ड बनाए हैं और इसमें खासकर आधुनिक कला के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन रहा है। कला जगत की लक्जरी पत्रिका ‘लक्सट्रोप’ के अनुमान के मुताबिक, भारतीय कला बाजार का आकार करीब 3,000 करोड़ रुपये है। सदी की शुरुआत में यह बाजार कुछ करोड़ रुपये तक सीमित था।
जिवराजका ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘यहां ज्यादातर बड़ी पेंटिंग की बिक्री निजी तौर पर होती है, जिसमें कीमत का पता सबके सामने नहीं चलता। आम बिक्री में, किसी अहम कलाकृति के साथ-साथ कई दूसरी कलाकृतियों पर भी ध्यान जाता है। ‘वोल्ट ऊना’ एक पेंटिंग को केंद्र में रखती है, जिसके साथ पूरी जानकारी, स्थिति और महत्व से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।’’ जिवराजका साल में 10 से 12 नीलामियां आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। मंच की पहली नीलामी में तैयब मेहता की 2002 में बनाई गई एक्रिलिक पेंटिंग पेश की जाएगी। यह कैनवास पर बनाई गई कलाकृति उनके चर्चित ‘रिक्शा चालक’ चित्रण से जुड़ी है।
‘वोल्टे ऊना’ में विक्रेता से कोई प्रीमियम शुल्क नहीं लिया जाएगा, जबकि खरीदार को खरीद मूल्य पर 15 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा।


