
रांची: वर्ष 2026 में वैश्विक तापमान में वृद्धि को देखते हुए देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना जताई गई है। हालात को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने गर्मी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि इस बार हीट वेव को हल्के में नहीं लिया जाएगा, क्योंकि उनकी एक लापरवाही से स्वस्थ पर गलत प्रभाव पड़ सकता है ।
हीट स्ट्रोक के लक्षणों से रहें सतर्क
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानव शरीर का सामान्य तापमान 36.4 से 37.2 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। अत्यधिक गर्मी में शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। यदि शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर पहुंच जाए तो हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। इसके लक्षणों में चक्कर आना, उल्टी, तेज सिरदर्द, ज्यादा प्यास लगना, पेशाब कम होना और मानसिक भ्रम शामिल हैं।
पानी और हल्का भोजन जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दिनभर पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है। प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी पीते रहना चाहिए। ओआरएस, नींबू पानी, लस्सी और ताजे फलों का रस फायदेमंद बताया गया है। तरबूज, खरबूजा, संतरा और खीरा जैसे मौसमी फल खाने की सलाह दी गई है। बासी भोजन और बहुत अधिक प्रोटीन वाले खाने से बचने को कहा गया है।
दोपहर में बाहर निकलने से बचें
लोगों को हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनने, धूप में निकलते समय टोपी या छाता इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर न निकलने को कहा गया है। शराब, ज्यादा चाय-कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक्स से दूरी रखने की भी अपील की गई है।
अस्पतालों में विशेष तैयारी
सरकार ने 1 मार्च 2026 से गर्मी से जुड़ी बीमारियों की रोजाना निगरानी शुरू कर दी है। सभी जिलों में हीट स्ट्रोक मैनेजमेंट यूनिट बनाने और कम से कम पांच बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट भी अनिवार्य किया गया है।
आपातकालीन नंबर जारी
बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, मजदूर और हृदय या सांस की बीमारी से पीड़ित लोग ज्यादा जोखिम में हैं। आपात स्थिति में 108 या 102 एम्बुलेंस सेवा पर तुरंत कॉल करने और प्राथमिक सलाह के लिए 104 हेल्पलाइन का उपयोग करने की अपील की गई है।
