बच्चों की सुरक्षा में निवेश करने के लिए एआई कंपनियों को मिले प्रोत्साहन : डब्ल्यूईएफ विशेषज्ञ

डब्ल्यूईएफ विशेषज्ञ कैथी ली ने भारत की शिक्षा में एआई साक्षरता को जोड़ने और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा व संरक्षण में निवेश करने वाली कंपनियों को सरकारी प्रोत्साहन देने पर जोर दिया।

Razi Ahmad
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नयी दिल्ली: विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की कृत्रिम मेधा (एआई) विशेषज्ञ कैथी ली ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में एआई साक्षरता को शामिल करने और बच्चों की सुरक्षा में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

विश्व आर्थिक मंच के सेंटर फॉर एआई एक्सिलेंस की प्रमुख ली ने कहा कि एआई से बच्चों के लिए शिक्षा, रचनात्मकता और भाषा संबंधी सुविधाओं के विस्तार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ हानिकारक सामग्री, निजता के उल्लंघन, भ्रामक जानकारी और शोषण जैसे जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

ली ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एआई सुरक्षा के उपाय स्थानीय भाषाओं, सांस्कृतिक परिस्थितियों, इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता के विभिन्न स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने चाहिए।

‘एआई के दौर में बच्चों की सुरक्षा और बेहतरी: सर्वश्रेष्ठ व्यवहार तथा प्रोत्साहन’ पर जारी एक श्वेतपत्र की सह-लेखिका ली ने कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि एआई कहां गलत हो सकता है, उससे मिली जानकारी की पुष्टि कैसे करनी चाहिए और किन परिस्थितियों में मानवीय निर्णय लेना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि एआई साक्षरता को शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के साथ ही बच्चों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एआई प्रणाली में सुरक्षा और बाल अधिकारों से जुड़े आकलन को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

ली ने कहा कि भारत में एआई मॉडल का परीक्षण विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों में किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और बाल सुरक्षा विशेषज्ञों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद, वित्तपोषण और स्वतंत्र मूल्यांकन के माध्यम से कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए निवेश करने को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

ली ने कहा, ‘‘सुरक्षा और नवोन्मेषण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बच्चे एआई के साथ बड़े होंगे। हमारा उद्देश्य उन्हें इसके सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल के लिए आवश्यक कौशल और संरक्षण प्रदान करना होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई एक उपाय पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था बच्चों की उम्र, विकास के स्तर और संबंधित एआई प्रणाली की क्षमताओं के अनुरूप होनी चाहिए। केवल उम्र की पुष्टि करने की व्यवस्था किसी प्रणाली को सुरक्षित नहीं बनाती।

ली ने कहा कि एआई को बच्चों की सीखने की क्षमता और स्वतंत्र निर्णय लेने की योग्यता को बढ़ावा देना चाहिए, न कि शिक्षकों, अभिभावकों या मानवीय संबंधों का स्थान लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि निजता संबंधी सेटिंग, अभिभावकों का नियंत्रण और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था सरल होनी चाहिए तथा सुरक्षा के मजबूत उपाय ‘डिफॉल्ट’ रूप से सक्रिय रहने चाहिए। किसी बच्चे को केवल इसलिए कम सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उसके माता-पिता के पास समय, संसाधन या डिजिटल जानकारी की कमी है।

ली ने कहा कि भारत के सामने अपने एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत क्षमता विकसित करने का अवसर है। इसके लिए भारतीय भाषाओं और परिस्थितियों के अनुरूप आंकड़ों, स्वतंत्र मूल्यांकन, शिकायत निवारण व्यवस्था और बाल अधिकारों पर प्रभाव के आकलन की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, विश्वविद्यालय और नागरिक समाज मिलकर साझा परीक्षण उपकरण, आंकड़े और विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकते हैं, ताकि छोटे स्टार्टअप भी बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित कर सकें।

ली ने कहा कि एआई के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में निजता, जवाबदेही, मानवीय निगरानी और शोषण से सुरक्षा के साझा मानक होने चाहिए, जबकि उनके क्रियान्वयन में भारत की भाषाई विविधता, शिक्षा व्यवस्था और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के तरीकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि बच्चों को एआई से दूर रखा गया है या नहीं। यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि वे एआई का इस्तेमाल करने के लिए कितने सुरक्षित और सक्षम हैं।’’

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।