
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस जैसी गंभीर लिवर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना, समय पर जांच, उपचार और बचाव के उपायों को बढ़ावा देना है।
हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर (यकृत) में सूजन आ जाती है। यह मुख्य रूप से हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई वायरस के कारण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस बी और सी दुनिया भर में हेपेटाइटिस से होने वाली अधिकांश मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यह बीमारी लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस का इतिहास और उद्देश्य
विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है। यह तिथि हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज करने और पहला हेपेटाइटिस-बी टीका विकसित करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग की जयंती के सम्मान में चुनी गई है। वर्ष 2008 में विश्व हेपेटाइटिस गठबंधन और WHO के सहयोग से इसकी शुरुआत हुई थी। वर्ष 2026 की आधिकारिक थीम अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी लोगों तक जांच, उपचार और देखभाल की समान पहुंच सुनिश्चित करना है।
हेपेटाइटिस से बचाव के प्रभावी उपाय
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। हेपेटाइटिस ए और बी के टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं। इसके अलावा हमेशा साफ पानी पिएं, स्वच्छ भोजन करें, हाथों की सफाई रखें और असुरक्षित यौन संबंधों से बचें। रेजर, टूथब्रश या इंजेक्शन की सुइयां किसी के साथ साझा न करें। टैटू, पियर्सिंग, रक्त आधान या चिकित्सा प्रक्रियाएं केवल प्रमाणित और स्वच्छ संस्थानों में ही कराएं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता से हेपेटाइटिस के अधिकांश मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि समाज मिलकर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित जीवनशैली अपनाए, तो भविष्य में हेपेटाइटिस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस हमें यही संदेश देता है कि जागरूकता और समय पर उपचार से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

