रांची: यूट्यूब से कमाई करने का सपना देखने वाले नए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए आने वाला समय आसान नहीं होगा, क्योंकि कंपनी ने 1 फरवरी 2027 से अपने मोनेटाइजेशन नियमों को बेहद सख्त करने की तैयारी कर ली है। नए दिशानिर्देशों के तहत केवल व्यूज या वॉच टाइम ही काफी नहीं होगा, बल्कि अब कमाई के लिए सभी ऑडियंस की वास्तविक भागीदारी और वीडियो देखने के समय को ध्यान में रखा जाएगा। नए मानकों के अनुसार अब चैनलों को मोनेटाइजेशन के लिए 4,000 वॉच टाइम घंटों की शर्त बढ़ा कर 8,000 घंटे करनी होगी, जबकि शॉर्ट्स से कमाई के लिए जरूरी व्यूज की सीमा को 3,000 से बढ़ाकर सीधे 9,000 कर दिया गया है।

कंपनी का मानना है कि केवल व्यूज से सही कंटेंट और दर्शकों के जुड़ाव का आकलन नहीं हो पाता, इसलिए आने वाले समय में ऐसे वीडियो अधिक राजस्व अर्जित करेंगे जिन्हें दर्शक पूरा और ध्यान से देखते हैं। यूट्यूब का यह कदम प्लेटफॉर्म पर बढ़ रहे फर्जी व्यूज, बॉट्स और घटिया या कॉपी-पेस्ट कंटेंट की समस्या से निपटने के लिए उठाया जा रहा है। इसका सीधा असर फेसलेस (बिना चेहरे वाले) चैनलों और बिना मेहनत के तैयार किए जाने वाले कंटेंट पर पड़ेगा।

दूसरी ओर, यूट्यूब की दुनिया में अब भी हिंदी कंटेंट निर्माताओं का दबदबा बरकरार है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 36 प्रतिशत हिंदी चैनल ही ऐसे हैं जो 6.5 लाख से ज्यादा व्यूज हासिल कर पाते हैं, लेकिन इसके बावजूद देश में हिंदी कंटेंट सबसे अधिक देखा जाता है। यूट्यूब के इस नए फैसले से एफिलिएट मार्केटिंग, पेड प्रमोशन और डिजिटल प्रोडक्ट के जरिए कमाई करने वाले गंभीर और प्रामाणिक क्रिएटर्स को लाभ होगा, जबकि केवल व्यूज पर निर्भर रहने वाले नए चैनलों को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।


