डेयरी क्षेत्र की रीढ़ हैं महिलाएं और छोटे किसान: PM मोदी

News Aroma
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ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने महिलाओं और छोटे किसानों को भारत के डेयरी क्षेत्र की रीढ़ करार देते हुए कहा कि इनकी बदौलत भारत दुनिया में डेयरी उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है।

उन्होंने कहा कि भारत की डेयरी सहकारी समितियों का अध्ययन, डेयरी क्षेत्र में विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली (Developed Digital Payment System) आदि कई देशों के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी हो सकता है।

PM Modi सोमवार को इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय डेयरी संघ विश्व डेयरी सम्मेलन (IDF WDS) 2022 के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

15 सितंबर तक चलने वाला यह सम्मेलन ‘पोषण और आजीविका के लिए डेयरी’ विषय पर केंद्रित है। इसमें 50 देशों के करीब 1500 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है

PM ने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। उन्होंने छोटे किसानों को भारत में डेयरी क्षेत्र की प्रेरक शक्ति करार देते हुए कहा कि आज डेयरी क्षेत्र से 8 करोड़ परिवारों को रोजगार मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे पैमाने के डेयरी किसानों के सामूहिक प्रयासों से भारत दुनिया में डेयरी उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल क्रांति (Digital Revolution) के कारण डेयरी क्षेत्र में प्रगति हुई है।

भारत की डेयरी सहकारी समितियों का अध्ययन, डेयरी क्षेत्र में विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली आदि कई देशों के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी हो सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुनिया के कई आर्थिक रूप से कमजोर देशों के किसानों के लिए Business Model बन सकता है।

प्रधानमंत्री (PM) ने कहा कि डेयरी क्षेत्र का सामर्थ्य ना सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देता है बल्कि ये दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख साधन है।

उन्होंने कहा कि विश्व के अन्य विकसित देशों से अलग, भारत में डेयरी सेक्टर की असली ताकत छोटे किसान हैं। भारत के डेयरी सेक्टर की पहचान “बड़े पैमाने पर उत्पादन” से ज्यादा “जनता द्वारा उत्पादन”की है।

भारत में डेयरी सहकारी का एक ऐसा विशाल नेटवर्क है

उन्होंने कहा कि आज भारत में डेयरी सहकारी का एक ऐसा विशाल नेटवर्क है जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में मिलना मुश्किल है। ये डेयरी कॉपरेटिव्स देश (Dairy Cooperatives Country) के दो लाख से ज्यादा गांवों में, करीब-करीब दो करोड़ किसानों से दिन में दो बार दूध जमा करती हैं और उसे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।

इस पूरी प्रकिया में बीच में कोई मिडिल मैन नहीं होता, और ग्राहकों से जो पैसा मिलता है, उसका 70 प्रतिशत से ज्यादा किसानों की जेब में ही जाता है। पूरे विश्व में इतना ज्यादा अनुपात किसी और देश में नहीं है।

PM ने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र में महिलाएं 70 % कार्यबल का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारत के डेयरी सेक्टर की असली कर्णधार महिला महिलाएं हैं। इतना ही नहीं, भारत के सहकारी समितियों की एक तिहाई से ज्यादा सदस्य महिलाएं ही हैं।

भारत के डेयरी सेक्टर के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया है

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से हमारी सरकार ने भारत के डेयरी सेक्टर के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया है। आज इसका परिणाम दूध उत्पादन से लेकर किसानों की बढ़ी आय में भी नजर आ रहा है। 2014 में भारत में 146 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था। अब ये बढ़कर 210 मिलियन टन तक पहुंच यानि करीब-करीब 44 % की वृद्धि हुई है।

PM ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में कृषि और डेयरी क्षेत्र में 1,000 से अधिक स्टार्टअप स्थापित किए गए

PM ने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र की एक और विशिष्टता हमारी स्वदेशी प्रजाति है। भारत में गायों और भैंसों की देशी नस्ल भारत के डेयरी क्षेत्र की एक और बड़ी ताकत है। वे सबसे कठिन मौसम में जीवित रहने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत डेयरी पशुओं का सबसे बड़ा डेटाबेस तैयार कर रहा है। डेयरी क्षेत्र से जुड़े हर जानवर को टैग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक टेक्नोल़ॉजी की मदद से हम पशुओं की बायोमीट्रिक (Biometric) पहचान कर रहे हैं।

इसे ‘पशु आधार’ नाम दिया है। खेती में मोनोकल्चर ही समाधान नहीं है, बल्कि विविधता बहुत आवश्यकता है। ये पशुपालन पर भी लागू होता है। इसलिए आज भारत में देसी नस्लों और हाइब्रिड नस्लों, दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है।

PM ने कहा कि भारत में हम पशुओं के यूनिवर्सल वैक्सीनेशन पर भी बल दे रहे हैं। हमने संकल्प लिया है कि 2025 तक हम शत % पशुओं को फुट एंड माउथ डिजीज़ और ब्रुसलॉसिस की वैक्सीन लगाएंगे। हम इस दशक के अंत तक इन बीमारियों से पूरी तरह से Free का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में भारत के अनेक राज्यों में लम्पी नाम की बीमारी से पशुधन की क्षति हुई है। विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। हमारे वैज्ञानिकों ने लम्पी त्वचा रोग की स्वदेशी वैक्सीन भी तैयार कर ली है।

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