दिल्ली ब्लास्ट इत्तेफाक या साजिश!

News Aroma
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नई दिल्ली: दिल्ली के एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग पर शुक्रवार शाम हुए धमाके ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह धमाका इजरायल दूतावास के पास हुआ है।

वह भी बीटिंग रिट्रीट समारोह शुरू होने के चंद मिनटों के बाद। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस बात की जांच कर रही है कि यह इतेफाक है या बीटिंग रिट्रीट समारोह के समय को ध्यान में रखते हुए ही यहां पर बम लगाया गया था।

जानकारी के अनुसार पुलिस को शाम 5.05 बजे एपीजे अब्दुल कलाम रोड स्थित कोठी संख्या 6 के बाहर धमाके की कॉल मिली थी। जगह इजराइली दूतावास के बिल्कुल पास है।

इस घटना से चंद मिनटों पहले ही विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह शुरू हुआ था। ऐसे में दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन इसके बावजूद बीटिंग रिट्रीट समारोह शुरू होते ही यहां पर धमाका हो गया और सभी जांच एजेंसियां मौके पर छानबीन के लिए पहुंच गई।

स्पेशल सेल इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लास्ट के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़े हुए सवाल

इस ब्लास्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा नई दिल्ली इलाके में किए गए सुरक्षा इंतजाम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर जहां एक तरफ ट्रैक्टर रैली के दौरान जमकर हिंसा हुई, तो वहीं दूसरी तरफ बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान यहां पर ब्लास्ट हो गया।

खास बात यह है कि बीटिंग रिट्रीट समारोह को ध्यान में रखते हुए इस पूरे इलाके को चाक-चौबंद सुरक्षा में रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद यहां पर ब्लास्ट हो गया।

आतंकी ब्लास्ट या शरारत, हो रही जांच

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह धमाका किस प्रकार का था। प्राथमिक जांच में पुलिस ने लो इंटेंसिटी ब्लास्ट होने की बात कबूल की है, लेकिन फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि यह किस तरह का धमाका था।

पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ब्लास्ट के पीछे कोई आतंकी संगठन है या फिर किसी ने शरारत करने के लिए फुटपाथ पर इस तरीके का ब्लास्ट किया है। इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है केवल तीन गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।

क्या होता है आईईडी ?

–आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) भी एक तरह का बम होता है।
–आईईडी को काम चलाऊ बम भी कहा जाता है क्योंकि ये कम पैसों में और जल्दी तैयार हो जाते हैं।
–बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए आतंकी इसका इस्तेमाल करते हैं।
–आईईडी ब्लास्ट होते ही मौके पर अक्सर आग लग जाती है।
–आईईडी ब्लास्ट में धुआं भी तेजी से निकलता है।
–इसमें आग लगाने वाले केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है।
–आतंकी खासकर इसे सड़क के किनारे लगाते हैं, ताकि गाड़ी का पहिया चढ़ते ही ब्लास्ट हो जाए।
–आईईडी को ट्रिगर करने के लिए रिमोट कंट्रोल, इंफ्रारेड ट्रिप वायर जैसे तरीकों का इस्तेमाल होता है।
–भारत में नक्सलियों द्वारा भी आईईडी का इस्तेमाल किया जाता है।

कब-कब हुए आईईडी ब्लास्ट ?

–1 मई 2019 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 15 जवान शहीद हुए।
–14 फरवरी, 2019 को पुलवामा हमले में 40 जवान शहीद हुए।
–2016 में पठानकोट एयरबेस में आतंकियों ने आईईडी ब्लास्ट किया।
–21 फरवरी 2013 को हैदराबाद में हुए हमले में आईईडी के जरिये विस्फोट किया गया था।
–फरवरी 2012 में दिल्ली में इजरायली दूतावास की एक कार को उड़ा दिया गया था।
–जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई, 2011 को 3 आईईडी ब्लास्ट हुए, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई।

आईईडी ब्लास्ट से बचने के उपाय

–उग्रवाद या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पैदल चलें।
–ताजा मरम्मत हुई मिट्टी, पुआल, चमकीली वस्तु, सड़क के किनारे तार के टुकड़े नजर आएं, उससे दूर रहें।
–रास्ते में चढ़ाई शुरू होने वाले स्थान पर सावधानी से गुजरें।
–लौटते समय जवान दूसरे रास्ते का उपयोग करें।
–एंबुस होने पर गाड़ी से तुरंत उतर जाएं।

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