चावल की कमी से बेहाल दुनिया, भारत मांग में संतुलन बनाने कर रहा कई देशों की मदद

News Aroma Media
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नई दिल्ली: खाने की थाली में चावल का महत्व किसी से छिपा नहीं है। दुनिया इस समय इसकी कमी से जूझ रही है।

भारत ने पहले भी दुनिया में चावल की कमी को संतुलित करने के लिए मदद की है।

एक बार फिर भारत पूरी दुनिया को चावल के मामले में संभालने जा रहा है।

दुनिया में चावल निर्यात करने के लिए भारत सरकार आंध्र प्रदेश में एक डीप वाटर पोर्ट का उपयोग करने जा रही है।

 ऐसा कई दशकों के बाद होने जा रहा है।

भारत सरकार के आदेश के अनुसार आंध्र प्रदेश के काकीनाडा डीप वाटर पोर्ट निर्यात होने वाले चावलों का प्रबंधन किया जा रहा है।

यहां इतना ज्यादा चावल जमा हो गया कि इसके पास स्थित एंकरेज पोर्ट पर भी चावल को निर्यात के लिए रखा जा रहा है।

यहीं से दुनिया भर के देशों में चावल की सप्लाई की जाएगी। खबरों के अनुसार यह आदेश बुधवार को देर शाम आया है।

काकीनाडा डीप वाटर पोर्ट भारत का सबसे बड़ी चावल प्रबंधन फैसिलिटी है।

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट बीवी कृष्णा राव ने कहा कि बंदरगाह पर माल ज्यादा जमा हो जाने से वेटिंग पीरियड चार हफ्ते तक हो गया है, पहले यह एक हफ्ते तक था।

इसकी वजह से लागत बढ़ रही है और निर्यात भी सीमित हो रहा है।

सरकार का कहना है कि काकीनाडा डीप वाटर पोर्ट पर चावल की खेप इसलिए ज्यादा जमा हो गई है क्योंकि इसकी मांग बहुत ज्यादा है।

यह मांग इसलिए ज्यादा है क्योंकि दुनियाभर के चावल उत्पादक देशों में चावल उत्पादन में काफी गिरावट दर्ज की गई है। वो सब भारत से चावल निर्यात करवा रहे हैं।

थाईलैंड और वियतनाम चावल के बड़े उत्पादक देश हैं लेकिन पिछले कुछ महीनों में ज्यादा बारिश और उसके पहले सूखे की वजह से चावल का उत्पादन नहीं हुआ।

इसलिए वैश्विक स्तर पर चावल की कीमतों में इजाफा हुआ है।

अब अगर भारत से ज्यादा से ज्यादा चावल दूसरे देशों में जाएगा तो भविष्य में कीमतों में कमी आ सकती है।

बीवी कृष्णा राव कहते हैं कि इस वैश्विक मांग और निर्यात की वजह से काकीनाडा डीप वाटर पोर्ट  से हर महीने 650,000 टन चावल निर्यात करने की तैयारी है। यह आम दिनों की अपेक्षा दोगुना है।

डीप वाटर पोर्ट से ये एक्सपोर्ट अगले कुछ दिनों में शुरू कर दिया जाएगा।

बीवी कृष्णा राव ने बताया कि भारत ने इस साल रिकॉर्ड 17 मिलियन टन चावल निर्यात किया।

जबकि, पिछले साल यह 14.2 मिलियन टन था।

वहीं, मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के लॉजिस्टिक्स विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी पवन अग्रवाल कहते हैं कि सरकार को उम्मीद है कि प्रीमियम बासमती चावल को छोड़कर बाकी चावल में इस साल 2 से 3 मिलियन टन निर्यात की बढ़ोतरी होगी।

सरकार भी क्षमता बढ़ाने के लिए पुराने एंकरेज पोर्ट पर निवेश कर रही है।

मुंबई के एक चावल डीलर ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि भारत के पास प्रचुर मात्रा में निर्यात के लिए चावल मौजूद है।

कीमतों की प्रतियोगिता के चलते कुछ अंतरराष्ट्रीय खरीदार थाईलैंड और वियतनाम की तरफ चले गए।

क्योंकि हमारे यहां से शिपिंग में देरी होती है।

लेकिन अब उम्मीद है कि इस कमी के चलते भारत के चावल की मांग दुनिया भर में फिर बढ़ेगी।

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