काठमांडू का थामेल बना सेक्स वर्क का गढ़, स्पा सेंटर के नाम पर फल-फूल रहा जिस्मफरोशी का धंधा

News Post
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Kathmandu’s Thamel becomes a bastion of sex work : नेपाल की राजधानी काठमांडू का मशहूर पर्यटन स्थल थामेल अब खुलेआम सेक्स वर्क के लिए बदनाम हो रहा है। रंग-बिरंगी लाइटों और बार-पबों के लिए मशहूर यह इलाका शाम ढलते ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों से गुलजार हो जाता है।

लेकिन इसके साथ ही यहां सेक्स वर्कर्स और उनके एजेंट्स की सक्रियता भी बढ़ जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले पांच सालों में थामेल में सेक्स वर्कर्स की संख्या दोगुनी हो गई है, जिसने इस क्षेत्र की छवि को प्रभावित किया है।

थामेल में क्या है नया ट्रेंड?

थामेल की सड़कों पर रात होते ही एक नया ट्रेंड देखने को मिलता है। एजेंट्स पर्यटकों और अन्य लोगों के बीच घूमते हुए उन्हें “स्पा सेंटर” और “बूम-बूम” (सेक्स सर्विस) का ऑफर देते हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये एजेंट करीब आकर फुसफुसाते हुए कहते हैं, “पार्टी करोगे? लड़की चाहिए? ट्रेडिशनल स्पा है, सब मिलेगा, बस एक बार चलकर देख लो।” ऐसा ऑफर हर 10-20 कदम पर सुनने को मिलता है।

रात 11 बजे के बाद, जब दुकानें और रेस्टोरेंट बंद होने लगते हैं, तब स्पा सेंटर्स और गेस्ट हाउसों के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा जोर पकड़ता है। बार-पब से निकलने वाले पर्यटकों के आसपास एजेंट्स और सेक्स वर्कर्स मंडराने लगते हैं। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहता है।

सड़कों पर खुलेआम धंधा

काठमांडू में दिल्ली के जीबी रोड या कोलकाता के सोनागाछी जैसे तयशुदा रेड लाइट एरिया नहीं हैं। इस वजह से थामेल, न्यू बस स्टैंड (पार्क), और रंग पार्क जैसे इलाकों में सेक्स वर्कर्स सड़कों पर खुलेआम ग्राहकों की तलाश करती नजर आती हैं। पर्यटक और स्थानीय लोग, जो मौज-मस्ती की तलाश में होते हैं, इन इलाकों में आसानी से मिल जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में यह धंधा तेजी से बढ़ा है, और अब यह थामेल की पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि थामेल में सेक्स वर्क का यह धंधा खुलेआम चल रहा है, लेकिन पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिखती। कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस धंधे में बड़े रसूखदार लोग शामिल हैं, जिसके चलते इसे रोकना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, समय-समय पर छापेमारी की खबरें आती हैं, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं दिखता।

Share This Article