
नई दिल्ली : ईरान और इस्राइल-अमेरिका में गहराते संकट के बीच भारत के सामने पश्चिम एशिया के कई देशों में काम कर रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। फिलहाल कुवैत, ओमान, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले 24 घंटों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अलग-अलग आश्वासन दिए हैं कि वे अपने यहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
स बीच, भारत ने अभी तक पश्चिम एशिया से अपने नागरिकों की निकासी का कोई निर्णय नहीं लिया है, क्योंकि हवाई क्षेत्र बंद हैं और समुद्री मार्ग से निकलना भी संभव नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि इस्राइल में रह रहे भारतीयों को सड़क मार्ग से पड़ोसी देश जॉर्डन जाने की अनुमति है। जून 2025 में इसी तरह के संकट के दौरान भी इस मार्ग का उपयोग किया गया था। ईरान में रह रहे लगभग 10,000 भारतीयों के लिए पिछले सोमवार एक एडवाइजरी जारी कर उन्हें किसी भी माध्यम से देश छोड़ने की सलाह दी गई थी। पिछले वर्ष जून में भारतीयों को ईरान से आर्मेनिया के रास्ते निकाला गया था। रविवार को जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ईरान से लगभग 1,200 कश्मीरी छात्रों को निकालने की मांग की।
रविवार को जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ईरान से लगभग 1,200 कश्मीरी छात्रों को निकालने की मांग की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पीएम मोदी को लिखे पत्र में विशेष रूप से केरल के प्रवासी भारतीयों के परिवारों के बीच बढ़ती चिंता का उल्लेख किया। विदेश मंत्रालय ने भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर कहा है कि उसके सभी मिशन भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं।
ईरान संकट के मुद्दे पर रविवार देर रात तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक चलती रही। प्रधानमंत्री सीसीएस के अध्यक्ष हैं तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसके सदस्य हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पश्चिम एशिया में रहने वाले और फंसे हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा हुई। स्थिति बिगड़ने पर उससे निपटने के तरीकों पर भी विचार किया गया।
