
गुवाहाटी : असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए शनिवार को ऐतिहासिक दिन रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में एक विशेष समारोह के दौरान चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे (लैंड पट्टा) वितरण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। चाय बगान के मजदूरों ने केंद्र सरकार के इस कदम को ऐतिहासिक बताया और इस फैसले की सराहना की। इस दौरान पीएम मोदी ने चाय के बागान और चाय श्रमिकों को अपने जीवन से कनेक्ट किया तो जमकर तालियां बजीं। पीएम मोदी ने कहा कि चाय बागान में काम करनेवाले श्रमिकों की चाय की पत्ती से बनी चाय बेच-बेचकर ही वह प्रधानमंत्री बने हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए टी बागान के श्रमिकों का सम्मान करना मतलब, मैं उनका कर्ज उतार रहा हूं। श्रमिक चाय बागान में काम करते थे। यह चाय की पत्ती दूर गांव में गुजरात तक पहुंचती थी।पीएम मोदी ने कहा कि उसी चाय की पत्ती से बनी चाय बेच-बेचकर वह प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गए। अब आप बताइए कि अगर टी गार्डनवालों की चाय नहीं होती तो मैं यहां पहुंचता क्या? ये टी गार्डनवालों की टी मेरे यहां पहुंची और मैं आज यहां आप तक पहुंचा। मां कामाख्या की ऐसी कृपा है कि आज मुझे अपने टी गार्डन के श्रमिक भाइयों का कर्ज उतारने का मौका मां कामाख्या ने मुझे दिया है।
