
रांची: राजधानी रांची में 27 मार्च को आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। इस दिन 14 अखाड़ों की भागीदारी के साथ भव्य महावीर झंडा जुलूस निकाला जाएगा। आयोजन की शुरुआत पुंडाग से सुबह 10:30 बजे झंडा उठाकर की जाएगी। इसके बाद शहर के अलग-अलग इलाकों से अखाड़े इस जुलूस में शामिल होते जाएंगे, जिससे पूरा माहौल धार्मिक रंग में रंग जाएगा।
कई इलाकों से निकलेगा जुलूस, शहर होगा भक्तिमय
पुंडाग के बाद बजरा, पंडरा, कांके रोड, हटमा, गोंदा टाउन, लालपुर, बरियातू, बूटी मोड़, कोकर और खेलगांव जैसे कई क्षेत्रों से यह जुलूस आगे बढ़ेगा। हर अखाड़ा अपनी खास प्रस्तुति के साथ शामिल होगा, जिससे आयोजन और भी आकर्षक बनेगा। अनुमान है कि इस मौके पर लाखों श्रद्धालु और दर्शक शामिल होंगे और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब जाएगा।
समापन और खास आकर्षण
इस भव्य जुलूस का समापन तपोवन मंदिर स्थित श्रीराम मंदिर में झंडा मिलान के साथ होगा, जो इस आयोजन का सबसे खास हिस्सा माना जाता है। यही वह क्षण होता है जिसका सभी लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं।
परंपरा का इतिहास भी खास
इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1929 में महावीर मंडल दुर्गा मंदिर ट्रस्ट, महावीर चौक से हुई थी। वहीं पुंडाग में इसकी नींव स्वर्गीय रानो-झानो देवी और चमन साहू ने रखी थी। समय के साथ यह परंपरा हजारीबाग से कोटेशन के रूप में रांची आई और आज एक बड़े धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है।
वर्तमान आयोजन और नेतृत्व
महावीर मंडल के अनुसार, इस वर्ष पुंडाग में महावीर झंडा की अगुवाई नंदलाल शर्मा, राकेश सिंह और प्रेमानंद साहू करेंगे। खास बात यह है कि अंग्रेजों के समय इस जुलूस पर रोक लगाने की कोशिश हुई थी, फिर भी लगभग 200 लोगों ने इसे जारी रखा। 1932 में बनाया गया महावीर झंडा आज भी करीब 12 फीट ऊंचा है, जो इस परंपरा की पहचान बना हुआ है।
