
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कवायद में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को ‘‘बंधक’’ बनाए जाने की घटना का बृहस्पतिवार को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया और ‘‘निष्क्रियता’’ को लेकर राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य अधिकारियों से जवाब देने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग को इस घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से कराए जाने का अनुरोध करने की अनुमति दी। अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी (DGP) सहित राज्य के आला अधिकारियों के आचरण को ‘निंदनीय’ बताया। इसके चलते दोपहर 3:30 बजे घेराव शुरू हुआ और तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया गया। रात 8:30 बजे तक भी बार-बार अनुरोध के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा डीजीपी और गृह सचिव को फोन किए जाने के बावजूद जिला मजिस्ट्रेट (DM) या एसपी मौके पर नहीं पहुँचे।
न्यायपालिका को चुनौती देने की कोशिश
बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह घटना केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि अदालत के अधिकारियों को डराने और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक ‘निर्लज्ज कोशिश’ थी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने वाले ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

